सांसद हेमा मालिनी के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर

बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाली हेमा मालिनी ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मथुरा के लोगों से बड़े-बड़े वादे किए, उन्हें दिवास्वप्न भी दिखाएं। जिसके बलबूते पर ही हेमा मालिनी ने मथुरा की लोकसभा सीट पर अपने पैर जमाए। लेकिन चुनाव जीतने के बाद दावे आज भी मथुरा की जनता को दर्द दे रहे हैं। आपको मथुरा के विकास की जमीनी हकीकत को जांचने-परखने के लिए अपनी नजर शहर के शोरगुल वाले इलाकों पर नहीं बल्कि शहर से कोसों दूर ब्रज की लाडली राधा रानी के गांव 'रावल वांगर' पर डालने की जरूरत है। जिसे प्रधानमंत्री द्वारा 11 अक्टूबर 2014 में चलाई गई 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' के तहत शहर की सांसद हेमा मालिनी के द्वारा विकास कार्यों की बयार लाने के लिए गोद लिया था।   जहां हेमा मालिनी के सांसद बनने के बाद गांव के बच्चों ने स्कूल बदला, रोगियों ने अस्पताल बदला, पानी की टंकी बनी, आरो का पानी भी मिला। बदलते वक्त के साथ मथुरा के इस गांव में बहुत कुछ बदला लेकिन नहीं बदला तो इस गांव के लोगों का नसीब। जो आज भी आस की उजास में बुनियादी सुविधाओं के गांव में आने का टकटकी लगाकर इंतजार देख रहे हैं। बड़ी शख्सियत होने के नाते क्षेत्र की जनता से हेमा मालिनी का नाता कम ही प्रगाढ़ हो पाया है। वैसे भी अगर उनकी सांसद निधि के बजट पर नजर डाली जाए तो एक सांसद को मिलने वाली 25 करोड़ की धनराशि में से हेमा मालिनी 15 करोड़ मांगे। जिसमें से 12 करोड़ के करीब ही अब तक शहर के लिए बनाई गई विकास कार्यों की परियोजनाओं पर खर्च हो पाए हैं।   गौरतलब है कि योगी जी को एक पत्र लिखकर सांसद हेमा मालिनी ने मथुरा के लिए कतिपय विकास परियोजनाओं की सौगात मांगी थी जिनमें-1- मथुरा-वृंदावन के प्रवेश मार्गों का सौंदर्यीकरण2- ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग का विकास3- नया बस स्टेशन स्थानांतरित करने की मांग4- राया में एलिवेटेड मार्ग एवं आरोवी का निर्माण5- यमुना या कालिदाह केशीघाट, विश्राम घाट पर ब्राह्मण घाट पर सेतु निर्माण6- दधेंटा पचावर मार्ग का नव निर्माण7- सड़क, सिंचाई और पेयजल की संदर्भित परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही कृष्णा थीम पार्क, मुक्ता आकाशीय रंगमंच, जवाहर बाग में विकास नगर आयुक्त की नियुक्ति करने और मथुरा को एनसीआर में शामिल कराने की भी आवश्यक कार्यवाही शामिल है। आपको मथुरा क्षेत्र की सबसे बड़ी बात से अवगत करना भी जरूरी है। यहां के बाशिंदे कहते हैं कि हेमा जी तब आती हैं जब कोई बड़ा आयोजन होता है। सांसद हेमा मालिनी के इसी रवैए की वजह से उनके द्वारा अमल में लाई गई विकास परियोजना भी मृत हो चुकी हैं। इसके अलावा भी कई ऐसी समस्याएं हैं जिनसे मथुरा की जनता मन ही मन दुखी है। सीएम योगी के प्रयास भी मथुरा के आवाम की आस नहीं ब्रज की पावन भूमि को अध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के पैमाने पर रखते हुए सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ 92 करोड़ 39 लाख 73 हजार रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और 294 करोड़ 35 लाख 60 हजार की परियोजनाओं का शिलान्यास भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं सूबे के मुखिया ने चालू वित्त वर्ष के बजट में ब्रज के लिए 125 करोड़ रूपये का प्रावधान भी किया है। जिसमें मथुरा-वृंदावन में एक ऑडिटोरियम बनाना शामिल है। लेकिन यमुना को अविरल-निर्मल करने की खोखली बयानबाजी ने मथुरा की जनता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अलग करने का काम किया है।   आपको बता दें कि मथुरा के विधायक श्रीकांत शर्मा और चौधरी लक्ष्मी नारायण दोनों ही प्रदेश में मंत्री हैं। बावजूद इसके भाजपा का चुनावी गणित गड़बड़ाता नजर आ रहा है। जहां एक तरफ जयंत चौधरी वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी अपनी कमर कस चुकी है। तत्काल अपनी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 3000 करोड़ की लागत से बनने वाली गंगा जल परियोजना का लोकार्पण भी किया था। लेकिन मथुरा की स्थिति में सांसद की ढिलाई के कारण आशानुरूप परिवर्तन देखने को नहीं मिला है। जिससे मथुरा की जनता का रुझान विपक्षी दलों की ओर बढ़ता जा रहा है।  ऐसे में भाजपा के पास एक मात्र विकल्प केवल प्रधानमंत्री ही बचते हैं। जो मथुरा की जनता को अपने मोदी मैजिक की सियासी रणनीति के बलबूते पर वोटबैंक में तब्दील कर सकते हैं और सांसद हेमा मालिनी को दोबारा कुर्सी पर बिठा सकते हैं। माना मथुरा की लाख समस्याएं हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तित्व भी राष्ट्रवादी है। जो शायद मथुरा की जनता का मस्तिष्क प्रच्छालन करने में सहायक हो?

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