फिर अखिलेश ने मुलायम की नहीं मानी

. सपा के वर्तमान संरक्षक मुलायम सिंह यादव और वर्तमान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच संबंधों की कहानी अक्सर मीडिया और लोगों का ध्यान खींचती है. वैसे तो अखिलेश यादव खुले मंच से अक्सर अपने पिता को अपनी तरफ ही बताते है लेकिन लोगों ने पार्टी की वर्चस्व की लड़ाई में पिता पुत्र के रिश्ते में पिता को पीछे छूटते देखा है. वर्चस्व की उस जंग के घाव को समय लगभग-लगभग भर ही रहा था कि एक बार फिर अखिलेश ने मुलायम की नहीं मानी. संभल से अपर्णा को लड़ने की आई थी खबरें आप को बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद ऐसी ख़बरें आ रही थी कि मुलायम सिंह चाहते है सपा के पुराने गढ़ संभल से अपर्णा यादव को लोकसभा चुनाव लड़ाने की बात रखी थी. ये चर्चा आम हो गई कि खुद मुलायम सिंह यादव अपनी पुत्रवधु अपर्णा यादव को इस सीट पर चुनाव लड़ाने के इच्छुक थे. लेकिन समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को चार और उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. सपा की ओर से जारी सूची के अनुसार, यूपी के गोंडा से विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को टिकट दिया गया है. वहीं, संभल सीट से शफीकुर्र रहमान को उम्मीदवार बनाया गया है. सपा की सूची के अनुसार, यूपी के बाराबंकी से राम सागर रावत पार्टी के उम्मीदवार होंगे. वहीं, कैराना लोकसभा सीट से तबस्सुम हसन सपा की ओर से चुनाव लड़ेंगी. वायरल हुई थी लिस्ट आप को बता दें कि कुछ समय पहले वॉट्सएप और फेसबुक पर लोकसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी की एक फर्जी लिस्ट भी वायरल हुई थी, जिसमें अपर्णा यादव को संभल से एसपी का प्रत्याशी बताया गया था। हालांकि बाद में पार्टी की तरफ से उसे फर्जी करार दिया गया था.शिवपाल खेमे में दिखती है अपर्णा खास बात ये है कि 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 2016 में जब मुलायम सिंह के परिवार में झगड़ा हो रहा था, तो उस समय अपर्णा अखिलेश की बजाय चाचा शिवपाल के खेमे में दिख रही थीं. इसके बाद अपर्णा ने लखनऊ कैंट सीट से 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा. उस चुनाव में अपर्णा के लिए मुलायम सिंह की बड़ी बहू और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने जमकर प्रचार किया था. हालांकि उस चुनाव में अपर्णा बीजेपी उम्मीदवार रीता बहुगुणा जोशी से चुनाव हार गई थीं.

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