होली के धमाल से गायब होने लगी ढप-चंग की थाप

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फाल्गुन की मस्ती चंग के बिना अधूरी है। शेखावाटी के चिराना में बनाये जाने वाले चंग-ढप प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य हरियाणा के सीमावर्ती जिलों में भी काफी लोकप्रिय हैं। यहां आम की लकड़ी से ढप के घेरे बनाए जाते हैं। ये घेरे चंग की गूंज को निर्धारित करते हैं। चंग के घेरे ही शेखावाटी की धमाल में होने वाली मस्ती का आधार होते हैं। कारीगर दौलतराम सैनी बताते हैं कि चिराना में बनने वाले घेरों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में काम में लिया जाता है। धमाल के लिए शेखावाटी के कलाकार विदेशों में कार्यक्रम करने के लिए यहां के चंग लेकर जाते हैं। ढप का उपयोग गींदड़ में भी किया जाता है। बुजुर्ग भी चंग की ताल से ताल मिलाकर मस्ती करते गांवों में नजर आते हैं। लेकिन सोशल मीडिया और एकाकीपन के इस दौर में आज ढप-चंग की ये मस्ती कहीं खो गई है। आम की लकड़ी से घेरे बनाने वाले कारीगर दौलत राम सैनी, सीताराम सैनी व खाल से चंग मंडने वाले गोपाल रेगर, बाबूलाल रेगर, रघूवीर बाकोलिया आदि ने बताया कि बाजार में अब पहले वाली बात नहीं है।

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