पान शौकीनों के होठों की लालीमा को बढ़ाने वाले पान दुकानदार आज भी महुआ के पत्तों में देते

प्रयागराज में महुआ काफी तादात में पाया जाता है। आज भी महुआ के फल और उसके पत्तों का उपयोग होता है। महुआ गर्मियों के सीज़न में गिरना शुरू हो जाता है और लोग अपने अपने पेड़ों के पास महुआ बिनने चले जाते हैं आज भी महुआ के खरीददार है जो महुआ के देसी और कच्ची शराब को बनाते है इसके लिए शराब बनाने वाले व्यापारी प्रयागराज के ग्रामीण अंचलों में महुआ के बिनने वाले और इकट्ठा करके रखने वाले लोगों से मिलते हैं एंव उनसे महुआ खरीदते हैं महुआ को व्यापारी ग्रामीणों से खरीदकर इकट्ठा कर लेते हैं जिससे महुआ को बिनकर रखने वाले किसान को बिना कुछ पैसे लगाऐ फ्री में कमाई हो जाती है। ग्रामीण महिलाओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कभी कभी सालभर बाद इकट्ठा करके बेचते हैं और तब ज्यादा पैसे मिलते हैं। महुआ के फल कच्चे हरे,पकने पर पीले ,सूखने पर लाल व हल्के मटमैले रंग का हो जाता है।इसके पत्ते बादाम के पत्तों की तरह होते है, इनकी पत्तल बनाई जाती है। महुआ के फूल सफेद, फल कच्चे हरे, पकने पर पीले तथा सूखने पर लाल व हल्के मटमैले रंग के हो जाते हैं। इसके फूल मीठे, फल कड़वे और पकने पर मीठे हो जाते हैं। महुआ के पेड़ खेत खलिहानों के आसपास व बागीचों और जंगल और पर्वतों पर पाए जाते हैं। इसके पेड़ ऊंचे और बड़े-बड़े होते हैं। पान के शौकीनों के होठों की लालीमा को बढ़ाने वाले पान को पान दुकानदार आज भी महुआ के हरे पत्तों में पान बांधकर अपने ग्राहकों को देते हैं। जिससे पान की ताज़गी महुआ के बंधे पत्तों की ताज़गी से स्वादिष्ट बना रहता है। किसानों को महुआ के पेड़ से जलाने के लिए जाड़े की सर्द रातों में जहां लकड़ी मिल जाती है तो वहीं गर्मियों के समय में महुआ से महुआ के फल मिलते है जिसको इकट्ठा करके ग्रामीण और किसान व्यापारी को बेचते हैं। तीसरे पान के पत्तों को बेचकर भी सालभर महुआ के पत्तों से पैसा कमाते हैं किसान भाई। तो महुआ के कई गुणकारी लक्षण है जिसका इस्तेमाल दवाओं के रुप में सेवन किया जाता है।

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