काल के गाल में समा रहे हैं गोवंश, कान्हा गौशालाओं में ना चारा ना पानी

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गोवंश को संरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार का दावा जमीनी हकीकत में नहीं उतर पा रहा है,कान्हा गौशालाओं में चारा पानी व इलाज के अभाव में गौवंशो की मौत का सिलसिला जारी है। चिलचिलाती धूप में चारे और पानी के अभाव में गोवंश गौशालाओं में भटक-भटक कर मर रहे हैं, कारण है कि उनको ना तो चारा मिल पा रहा है और न ही पानी। ऐसे में गोवंश बीमार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं। गौशालाओं की देखरेख कर रहे लोग गौशालाओं के बगल में ही मरे हुए गौवंश को फेंक दे रहे हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में बदबू फैल रही है और फैल रही बदबू से संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। मामला अयोध्या जनपद के मिल्कीपुर तहसील का है।मिल्कीपुर तहसील के परसावां कान्हा गौशाला में सैकड़ों गोवंश को रख जरूर कर दिया गया है, लेकिन इनके खाने के चारे के लिए व पानी के पीने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। चिलचिलाती धूप में यह गोवंश गौशाला में इधर-उधर भटक रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं। बीमार होने के बाद जब इनकी मौत हो जाती है,तो गौशाला के लोग ही इसके मृत शरीर को उठाकर गौशाला के बाहर गड्ढे या फिर खुलो में ही फेंक देते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध फैल रही है। इस दुर्गंध के चलते बीमारी फैलने की आशंका बढ़ती जा रही है। प्रदेश सरकार की गोवंश के संरक्षण की योजना जिला प्रशासन कितने संवेदनशीलता से चला रहा है, यह आप तस्वीरों में देख सकते हैं, कि किस तरह से गौवंश के कंकाल बिखरे पड़े हैं और उन्हें कुत्ते नोच रहे हैं। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि गोवंश के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन कितना संवेदनशील है। गोवंश की मौत के चलते अब स्थानीय ग्रामीणों के बीच संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि मृत गौ वंशो को दफनाया भी नहीं जा रहा है, बल्कि उनके मृतक गोवंश को बाहर ही खुले में फेंक दिया जा रहा है, इस स्थिति से ग्रामीण परेशान हैं और प्रशासन तक विनती पहुंचा चुके हैं, फिर भी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।

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