जीवन में 16 वर्ष की उम्र में होता है समुद्र मंथन: राम नारायण त्रिपाठी

चित्रकूट अग्रवाल धर्मशाला कर्वी चित्रकूट में हो रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस में कथाकार डॉक्टर राम नारायण त्रिपाठी जी ने प्रहलाद चरित्र के माध्यम से नरसिंह अवतार की कथा का श्रवण कराते हुए कहा यदि पुत्र सदाचारी हो तो दुराचारी माता-पिता का भी उद्धार हो जाता है प्रह्लाद की सुंदर कथा प्रसंगों को समझाते हुए भक्ति के सूत्रों को दिया इसके बाद कच्छप अवतार की सारगर्भित कथा श्रवण कर आई हर युवा के जीवन में 16 में वर्ष में समुद्र मंथन होता है उसे श्रेष्ठ आधार की जरूरत होती है यदि उसने भगवान का आधार पकड़ लिया तो निश्चित रूप से जीवन संपदा का मंथन करने से भक्ति रूपी अमृत प्रगट होता है जिससे उसका जीवन अमर बन जाता है। अन्यथा उत्पन्न होने वाले वासना के हलाहल से युवा का जीवन बिगड़ जाता है जीवन व्यर्थ हो जाता है इसी प्रकार से भगवान के अवतार की कथा सुनाई की दाता का यदि दान पवित्र है तो उसे लेने के लिए भगवान ही स्वयं बामन बन कर के उसके द्वार पर जाते हैं. जिस घर में ब्राह्मण के द्वारा वेद मंत्र का उच्चारण कभी नहीं होता वह घर कितना बड़ा क्यों ना हो परेशान के समान ही रहता है वामन अवतार की कथा श्रवण कराते हुए कहा की जीवन संकट में पड़ जाने के बाद भी राजा बलि ने अपने श्रेष्ठदान से पीछे नहीं हटे भले ही उनके गुरु ने समझाया कि से तुम्हारा जीवन संकट में फंस जाएगा। अभी तुम मना कर दो लेकिन राजा बलि ने कहा कि जब लेने के लिए भगवान ही आए हो तो देने का इससे अच्छा और क्या हो सकता है आज भी युक्ति पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने युग निर्माण के लिए मैदान याचना की है आज भी यदि हमसे देते बना तो हमारा जीवन सिद्ध हो जाएगा गज ग्राह की कथा सुनाते हुए कहा की राग में फंस कर के व्यक्ति का जीवन दुखी हो जाता है. परिवार के धक्के सहने के बाद भी यदि भगवान की मृत्यु हो जाए तो जीवन सार्थक हो जाता है गजराज को तो संकट में फंसने के बाद याद आ गया कि भगवान के अलावा कोई भी मृत्यु काल में साथ ही नहीं हो सकता जो व्यक्ति समझदार है ज्ञान विज्ञान के आधार पर ही भगवान को स्मरण करता है तो उसकी मृत्यु की पीड़ा और जीवन में रागों का बंधन ढीला क्यों नहीं हो सकता सूर्यवंश और चंद्र की कथा श्रवण कराते हुए भगवान राम के मार्मिक प्रसंगों का चिंतन कराया इसके बाद भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उद्देश्य बताया जब जब इस धरती पर अनाचार अत्याचार पापा 4 बढ़ता है तब तक भगवान विविध रूपों में आकर के भक्तों की और अपनी बनाई। व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करते हैं इसके लिए भगवान के 24 अवतार हो चुके हैं सुंदर भगवान के जन्म के उत्सव नंद उत्सव का आयोजन हुआ सभी ने उत्साह पूर्वक भाग लिया इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से कुमार बालेंद्र सिंह डॉ सुरेंद्र अग्रवाल जी राम प्रकाश द्विवेदी दीनदयाल मिश्रा चुन्नी लाल विश्वकर्मा जी एवं अन्य सैकड़ों महत्वपूर्ण व्यक्ति उपस्थित रहे.

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