सूखे तालाब से कैसे बुझेगी प्यास

अप्रैल महीने से ही गर्मी की शुरुआत होने लगती है और इसी के साथ ताल,पोखरा, सरोवरों या यूं कहें जलाशयों के सूखने का क्रम शुरू हो गया है। सरकार द्वारा इन आदर्श जलाशयों पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपए खर्च करती है उसके बावजूद भी पानी के संचय व भू-जल स्तर के सुधार की कोई स्थिति नहीं देखी जा रही है। अभी शुरुआत में यह हाल है तो मई - जून में क्या हाल रहेगा ? पशु -पक्षियों, बेजुबानों की प्यास कहाँ बुझेगी? अगर ऐसा ही रहा तो मई-जून में क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर काफी नीचे चला जायेगा। लोगों को पीने लायक शुद्ध पेयजल हैंडपंप से नही मिलेगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुये सरकार ने बरसात के पानी व भू-जल स्तर को बढाने के मकशद से वर्ष 2005 से 2008 तक जिले के सभी ग्राम पंचायतों में आदर्श जलाशय का निर्माण कराया था।जिसके रखरखाव और सुंदरीकरण को लेकर प्रत्येक वर्ष ग्राम पंचायतों से धन खर्च किया जाता है। लेकिन गर्मी आते आते उन जलाशयों का सूख जाना एक आम बात हो गई है। ऐसे में देखा जाये तो अधिकतर जलाशय या तो सूख गये हैं, या फिर सूखने के कगार पर हैं। उन जलाशयों के चारो तरफ लगवाये जाने वाले कंटीले तारों व पेड पौधों का कुछ पता नहीं है। तो कुछ जलाशय जलकुंभी व झाडियों में अपने आस्तित्व को खोज रहे हैं। इन सभी बातों को लेकर देखना यह है कि जिले के जिम्मेदार इस पर क्या ध्यान देते हैं।

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