सीएम के वायो मेट्रिक से हाजरी के आदेश ठेंगे पर, स्टोर की पड़ी है मशीनें

सफाई कर्मियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए खरीदी थीं वायो मेट्रिक मशीनें  गाजियाबाद। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी महकमों में स्टाफ की वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति तय करने के आदेश मजाक बनकर रह गए है। जहां शहर की सफाई व्यवस्था से जुडे कर्मचारियों की दो वक्त उपस्थित तय करने के लिए वायो मेट्रिक मशीन से हाजरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है,वहीं अभी तक एक वक्त की वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति तय नहीं हो पायी है। वजह जिन मशीनों की खरीद पर लाखों रूपए खर्च किए गए वह नगर निगम के हेल्थ विभाग के स्टोर में धूल फाक रही है। हेल्थ विभाग के अधिकारी एक वक्त की वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति सुनिश्चित करने के नाम पर गुमराह कर रहे है। नतीजा ये है कि किस वार्ड में कितने कर्मचारी तैनात है और उनमें से कितने डयूटी पर आ रहे है ये कोई भी दूर तक देखने वाला नहीं है। लगातार पार्षदों के द्वारा आवाज उठाने के बाद स्थिति में सुधार होता नहीं दिख रहा है। यहां बता दे कि हाल में संपन्न हुई नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक के दौरान कई सदस्यों के द्वारा सफाई व्यवस्था से जुडे स्टाफ की वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इस दौरान अधिकारी दोहराते रहे कि वायो मेट्रिक मशीन से एक वक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करने के कदम उठाए गए है। जबकि निगम सूत्रों खुलासा हुआ कि एक वक्त की वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति सुनिश्चित अभी तक नहीं हो पायी है। वजह अभी तक इन मशीनों का वितरण ही नहीं हुआ है। ये मामला कई बार सदन की बैठकों में उठ चुका है कि एक एक वार्ड में सौ से डेढ सौ सफाई कर्मचारी तैनात है,इनमें से पचास कर्मचारी भी वार्डों में दिखाई नहीं पडते है। ज्यादातर मशीनें निगम के हेल्थ विभाग के स्टोर में धूल फाक रही है। जिन बाक्स से मशीनों को मंगाया गया वह खुले ही नहीं है।  वजह ये है कि निगम अधिकारी जानते है कि यदि वायो मेट्रिक मशीन से उपस्थिति सुनिश्चित करने के कदम उठाते है तो इस व्यवस्था के बाद कर्मचारियों से आपात कालीन स्थिति में काम लेना चुनौती पूर्ण हो जाएगा।यहां बता दे कि हाल में जिला मलेरिया विभाग के स्टाफ के बगैर उपस्थिति के मुफत का वेतन पाने का मामला हाल में डीएम के सामने उठाया गया। डीएम को लिखित में अवगत कराया गया था कि एक एक कर्मचारी को सैलरी के तौर पर चालीस हजार रूपए का भुगतान किया जाता है इसमें से दस हजार रूपए प्रति कर्मचारी अधिकारियों की जेब में हिस्से के तौर पर जाता है। कांग्रेसी पार्षद अजय शर्मा कहते है कि उनके भी संज्ञान में ये मामला आया है जो कि बहुत ही गंभीर पहलू है सदन की बैठक के दौरान पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।निगम कार्यकारिणी के सदस्य राजेंद्र तितोरिया कहते है कि यदि इस तरह का मामला है तो वह निश्चित तौर पर गंभीर है। लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी। हालांकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा आरबी सुमन ने दावा किया कि तमाम जोन में वायो मैट्रिक मशीनों का वितरण कर दिया गया है। वायो मेट्रिक मशीनों से कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है।

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