प्राचीन गोविंद देव मंदिर के दाहिनी ओर गर्भगृह में स्थापित है माँ योगमाया का मंदिर

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नगर के प्राचीन देवी मंदिरों में से एक माँ योगमाया देवी का मंदिर प्राचीन गोविंद देव मंदिर की परिक्रमा में दाहिनी ओर स्थापित है. मंदिर के गर्भगृह में विराजमान माँ योगमाया देवी को पाताल देवी के नाम से भी जाना जाता है. बताया जाता है कि माँ योगमाया के दर्शन भक्तों को सालभर में चैत्रशुक्ल पक्ष व शारदीय नवरात्र में सिर्फ दो बार ही सुलभ होते हैं. मंदिर की गर्भगृह में लगभग 15 फ़ीट गहरी गुफा में विराजमान माँ योगमाया (पाताल देवी) के दर्शनों के लिए भक्तों को श्रृंखला बनाकर ही कतारबद्ध तरीके से सुलभ होते हैं. मंदिर की गुफा का आकार इतना छोटा है कि एक साथ 10 लोग दर्शन करना चाहें तो उन्हें एक दूसरे के गुफा से बाहर आने का इंतजार करना पड़ता है. मंदिर के पुजारी श्यामसुंदर शर्मा की मानें तो इस मंदिर का इतिहास साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है, जब रूप गोस्वामी ने प्राचीन गोविन्ददेव मंदिर की स्थापना की थी. तभी उन्होंने गर्भगृह में माँ योगमाया की प्रतिमा भी स्थापित कराई थी, जो वर्तमान में पाताल देवी के नाम से पूजित है.

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