टेसू और झाँझी विवाह परंपरा आज भी है जीवंत, घर-घर पैसे एकत्रित करते हैं बच्चे

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शहरी क्षेत्र में भले ही आज टेसू-झाँझी की परंपरा विलुप्त होती दिखाई दे रही हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ आज भी टेसू-झाँझी का विवाह बच्चों व युवाओं द्वारा रीति-रिवाज व पूरे उत्साह के साथ कराया जाता है. जो इस बात का प्रतीक है कि अपनी प्राचीन परंपरा को सहेजने में गांव आज भी शहरों से कई गुना आगे हैं. नन्हे मुंन्हे बच्चे मिट्टी से बने पुतलों ओर मटकी रूप में बनी झाँझी को हाथों में लेकर अड़ता रहा टेसू, नाचती रही झाँझी टेसू गया टेसन से पानी पिया बेसन से...', 'नाच मेरी झिंझरिया...' आदि गीतों को गाकर जब पैसे मांगते है तो उछलती-कूदती बच्चों की टोली देख कोई इन्हें अपने द्वार से खाली हाथ ही लौटा देता है तो कहीं ये गाने गाकर लोगों का मन मोह लेते हैं मनोरंजन करते हैं.

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