प्रभु श्री राम ने ब्रह्म हत्या दोष निवारण के लिये मथुरा से बुलाये थे ब्राह्मण

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मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का मथुरा से गहरा नाता रहा है. सनातन संहिता के अन्तर्गत रावण का वध करने के कारण प्रभु राम को ब्रह्म-हत्या का दोष लगा. इस पर उनके पुरोहितों ने उन्हे इस दोष के निवारण कराने की सलाह दी. चक्रवर्ती सम्राट राजा राम ने इस प्रयोजन के लिये पंडितों को निमंत्रित कर व्यवस्था सुनिश्चित करने को अपने मन्त्रियों को आदेशित किया, लेकिन सभी जगहों के पंडितों ने ब्रह्महत्या निवारण की मनाही कर दी. काफ़ी प्रयत्न के बाद राम के अनुज शत्रुघ्न की राजधानी मधुपुरी (वर्तमान में मथुरा) से 250 सनाढय ब्राह्मण विद्वान एवं 750 सरयूपारीण कान्यकुब्ज ब्राह्मणों ने दोष निवारण का अनुष्ठान पूर्ण कराया. विदित हो कि त्रेतायुग में मथुरा में मधु नामक दैत्य के पुत्र लवणासुर का आतंक था. राम ने अनुज शत्रुघ्न को मथुरा का शासक बनाया एवं शत्रुघ्न ने लवणासुर सहित उस के आतंक को समाप्त किया. इतना ही नहीं मथुरा राम के भक्त ध्रुव की तपस्थली भी रही है. साहित्यकार ज्वाला प्रसाद ने इसका 250 वर्ष पूर्व लिखी अपनी टीका (शोध) में उल्लेख किया है.

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