बड़े प्यार से खेलते हैं बच्चे टेसू का खेल, गाँवों में जिन्दा है खेल की संस्कृति

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उत्तर प्रदेश में खासतौर से बच्चे टेसू का खेल बड़े प्यार से खेलते हैं. जबकि बच्चों को इसकी जानकारी नही है क़ि टेसू है क्या सिर्फ एक खिलौना या कुछ और. टेसू में तीन लकड़ियों के बंधे हुए एक ढांचे पर एक सिर रखा होता है और धड़ नहीं हैं उसी प्रकार खाटू वाले श्याम भगवान का भी सिर्फ सिर ही है उनका भी धड़ नहीं दिखाया गया है और वो भी लकड़ी के तीन डंडो पर रखा हुआ है. मान्यता के हिसाब से घटोत्कच के पुत्र को टेसू उर्फ़ बर्बरीक माना जाता है पौराणिक मान्यता ये भी है क़ि देवोथान से पहले टेसू और झाँझी की शादी कराई जाती है जिससे जो भी परेशानी आये वो इसी में आ जायेगी फिर नही आएगी. जबकि समय के हिसाब से गाँव में ही ये संस्कृति जिन्दा है शहर में लुप्त होती जा रही है.

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