9वीं और 11वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर, जानें क्यों परेशान हैं टीचर और पेरेंट्स

नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है. दरअसल अब बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्न पत्र की तरह अब नौंवी और 11वीं के प्रश्न पत्र भी तैयार करेगा। दोनों कक्षाओं के लिए बोर्ड ने कुछ विषयों का चयन किया है। यह ऐसे विषय होंगे, जिनमें छात्रों के कम मार्क्स आते हैं.  क्यों उठाया गया ऐसा कदम : बता दें कि बोर्ड का मानना है कि इस प्रयास से विद्यार्थियों के चिंता व तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अंक प्रतिशत भी काफी हद तक बढ़ जाएगा। सीआईएससीई बोर्ड के अनुसार, नौवीं और 11वीं की फाइनल परीक्षा फरवरी-मार्च में होगी। इन कक्षाओं के कुछ विषयों के प्रश्न पत्र सीआईएससीई तैयार करेगा। हालांकि, यह बोर्ड परीक्षा नहीं है।  क्या होगा फायदा : सीआईएससीई का मानना है कि यह कदम काफी लाभकारी होगा। इससे विद्यार्थियों को बोर्ड के संपर्क में आने का भी अवसर मिलेगा। जब बोर्ड कुछ विषयों के प्रश्न पत्र तैयार करेगा तो इससे उन्हें परीक्षा में बोर्ड पैटर्न, प्रश्न पत्रों के फॉर्मेट, प्रश्न पत्र के प्रकार भी का भी पता चल सकेगा। इस बात की भी जानकारी हो जाएगी कि बोर्ड परीक्षा में किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं और क्या पैटर्न होता है। इससे बोर्ड परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन में सुधार होगा।  क्या है पैरेंट्स और टीचर्स का कहना?पैरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि इससे बच्चों का मानसिक तनाव बढ़ेगा। इस संबंध में ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, 'आखिर काउंसिल कितनी बोर्ड परीक्षाएं कराना चाहती है? ऐसा करने से सिर्फ स्टूडेंट्स और पैरेंट्स का मानसिक तनाव ही बढ़ेगा। 10वीं व 12वीं के अलावा बोर्ड जैसी और कोई परीक्षा नहीं होनी चाहिए।' बता दें कि इस मामले में मुंबई पैरेंट एसोसिएशन ने एक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत भी कर दी है। 19 अगस्त तक 13 हजार से ज्यादा पैरेंट्स बोर्ड द्वारा फैसला वापस लिए जाने संबंधी याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। वहीं स्कूल टीचर्स भी बोर्ड के फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि इससे स्कूल का पाठ्यक्रम प्रभावित होगा। कई सीआईएससीई स्कूल पहले से ही स्टूडेंट्स को बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार करना शुरू कर देते हैं। 9वीं व 11वीं में सवाल भी उसी तरह पूछे जाते हैं। 60 फीसदी सवाल 9वीं या 11वीं और 40 फीसदी सवाल क्रमशः 10वीं या 12वीं से पूछे जाते हैं। 

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