बाल विकास मंत्री के क्षेत्र में हजारों की तादात में कुपोषण का शिकार बच्चे

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देश के पीएम नरेंद्र मोदी 8 मार्च 2018 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना का शुभारंभ किया था । इसका लक्ष्य लगभग 10 करोड़ लोगो को लाभ पहुचाने का था । लेकिन वास्तव में राष्ट्रीय पोषण योजना का लाभ कुपोषण के शिकार लोगो को इसका लाभ मिल रहा है या फिर सिर्फ कागजों में ही इस योजना का संचार किया जा रहा है । इसकी पड़ताल करने के लिए हम सबसे पहले निकल पड़े पीलीभीत से लगभग 60 किलोमीटर दूर बमरौली और लिलहर गांव जब बमरौली गांव में पहुचे तो कुपोषण के शिकार हुई बच्ची के परिजनों से योजना का हाल जानने की कोशिश की तो यहां तो योजना का हाल बेहाल पता चला । परिजनों की माने तो उनके बच्चों को किसी भी प्रकार की योजना नही मिल रही है । पोषाहार भी नही मिलता है हाल यह है कि पोशाहार जांबरो को खिलाया जाता है । और कुपोषण के शिकार लोगो को इसका लाभ नही मिलता है । वही लिलहर गांव में भी जब परिजनों से योजनाओ के बारे में पूछा तो यहां भी निराशा हाथ लगी ।हाल यह है कि इस योजना का धरातल पर कोई भी बजूद नही है । इसके बाद जब पीलीभीत से सटे गांव गौटिया पहुचे तो यहां भी लोगो ने इस योजना को कोसो दूर बताया । कुल मिलाकर इस योजना को कुपोषित वच्चो को किसी भी प्रकार का लाभ नही मिल रहा है ।योजना के अनुरूप आंगनबाड़ी महिलाओ को स्मार्ट फोन,कम्यूटर का प्रयोग साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ती बच्चे के जन्म के बाद 1000 दिन बाद भी स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रशिक्षित किया जाए साथ ही गर्भवती महिलाओं को कुपोषण की जानकारी देना । लेकिन यहां तो आज भी आंगनवाड़ी महिलाओ को नातो स्मार्ट फोन मिला और नाही कप्यूटर और नाही किसी तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है । हालत ऐसे है कि यह आंगनवाड़ी महिलाओ को कुपोषण के शिकार बच्चो को पोशाहार आता तो है लेकिन यह बेच दिया जाता है और लोग इसे खरीदकर जांबरो को खिलाते है । जब जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि आंगनवाड़ी महिला कार्यकर्ताओं के बारे में पूछा तो साहब ने भी कोई मुकम्बल जबाब नही दिया । अरविंद कुमार की माने तो पीलीभीत में कुपोषित बच्चों की संख्या 29924 है । लेकिन आंगनबाड़ी माहिलाओं को स्मार्ट फोन , कम्प्यूटर दिये जाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया । साथ ही आंगनवाड़ी महिलाओ को का कोई खास दायित्व नही बताया लेकिन पीलीभीत में पोशाहार को जांबरो को खिलाने की बात कई बार सामने आ चुकी है । जब पीलीभीत से 60 किलोमीटर दूर कुपोषित जावित्री उम्र 10 माह के परिजनों से योजना का हाल पूछा तो परिजनों को जबाब था कि उनको किसी भी प्रकार की कोई भी सुविधा या आंगनवाड़ी महिलाओ द्रारा किसी भी प्रकार की जानकारी नही दी जाती है । साथ ही पोशाहार भी नही मिलता है आंगनवाड़ी कार्यकर्ताए पोशाहार जानवर पालने बालो के हाथ बेच देती है और जांबरो को खिलाया जाता । यही हाल हमे गांव लिलहर और संडा गौटिया का भी दिखा । कुल मिलाकर पीलीभीत की सांसद व महिला वाल विकास मंत्री मेनका गांधी के क्षेत्र में कुपोषित बच्चों के नाम पर सुविधाओ का यह हाल है तो बाकी जिलो में सुविधाओं की हकीकत का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है ।

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