बाल विवाह की रोकथाम के लिए बैठक आयोजित हुई

अक्षय तृतीया पर्व, पीपल पूर्णिमा एवं अन्य अवसरों पर बाल विवाह के आयोजन की संभावना के मद्देनजर बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए ग्राम एवं तहसील स्तर पर पदस्थापित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, अधिकारियों को दायित्व सौपे गए है। जिला कलक्टर आशीष गुप्ता ने बताया कि अक्षय तृतीया पर्व, पीपल पूर्णिमा एवं अवसरों पर संभावित बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के साथ साथ जनसहभागिता व चेतना जागृत करने विभागवार दायित्व सौंपे है और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अधीन विविध प्रावधानों के तहत कार्यवाही करने के लिए आदेशित कर दिया गया है।  उन्होंने जारी आदेश में उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग को जिला ब्लॉक एवं जिला स्तर पर गठित विभिन्न सहायता समूह, महिला समूह, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनवाडी कार्यकर्ता, साथिन, सहयोगिनी के कोर ग्रुप सक्रिय करने, उप खण्ड मजिस्ट्रेट तथा उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग को ऐसे व्यक्ति व समुदाय जो विवाह सम्पन्न कराने में सहयोगी है तथा हलवाई, बैण्ड-बाजा, पण्डित, बाराती, पण्डाल व टेण्ट लगानेवाले ट्रान्सपोर्ट आदि पर बाल विवाह में सहयोग न करने का आश्वासन लेने एवं उन्हें कानूनी जानकारी देने तथा आवश्यकता होने पर समूहों व संस्थाऔ के माध्यम से जनसहभागिता के कार्यक्रम आयोजित करने का दायित्व सौपा गया है।इसी तरह उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग तथा विकास अधिकारी पंचायत समिति को  निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ चेतना बैठकों का आयोजन करने, ग्राम सभाओं में सामुहिक रूप से बाल विवाह के दुष्प्रभावों की चर्चा करने व इनकी रोकथाम की कार्यवाही करने, किशोरियों, महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों व विभिन्न विभागों के कार्यकर्ता जैसे स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, कृषिसमाज कल्याण, प्राथमिक शिक्षा विभागों के साथ समन्वय बैठक आयोजित करने, विवाह के लिए छपने वाले निमन्त्रण पत्र में वर-वधु के आयु के प्रमाण संबंधित व प्रिन्टिग प्रेस वालों के पास रहे अथवा निमंत्रण पत्र पर वर-वधु की जन्म तारीख प्रिन्ट किए जाने, सार्वजनिक स्थानों पर सूचना बॉक्स रखे जाने तथा नियंत्रण कक्ष स्थापित करने, विद्यालयों के स्तर पर  बाल विवाह के दुष्परिणामों व व इससे संबंधित विधिक प्रावधानों की जानकारी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्तागण, विधि के छात्रों, पैरा लीगल वोलियेन्टर्स आदि के माध्यम से स्कूलों व अन्य पर दी जाने का दायित्व निर्धारित किया गया है। उन्होंने समस्त प्रिन्टिंग प्रेस के लिए निमन्त्रण पत्र में वर-वधु की जन्म तारीख प्रिन्ट किए जाने के निर्देश दिए है वहीं जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक एवं माध्यमिक के लिए बाल विवाह संबंधी कानून की जानकारी स्कूलों व अन्य स्थानों पार दिए जाने, प्रार्थना सभा में आवश्यक जानकारी देने, प्रभात फेरी, वाद विवाद, निबंध लेखन, चित्रकला आदि के द्वारा बाल विवाह की रोकथाम की जागरूकता के दायित्व सौपे गए है। इसी तरह उपखण्ड मजिस्ट्रेट, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सहायक निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग के ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं को जोडन, पटवारी, अध्यापिका को बाल विवाह होने पर निकट के पुलिस स्टेशन में सूचना का दायित्व सौपा गया है।  आदेश में उपखण्ड मजिस्ट्रेट को बाल विवाह की स्थिति में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के तहत नियुक्त बाल विवाह प्रतिषेघ अधिकारियों की जवाबदेही नियत की जाने, बाल विवाह सम्पन्न होने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई, सामूहिक चर्चा से मिली जानकारी के आधार पर समझाईश करने, जहां आवश्यक हो वहां कानून द्वारा बाल विवाह रोके जाने, अक्षय तृतीया से एक माह पूर्व उपखण्ड कार्यालयों में नियन्त्रण कक्ष स्थापित करते हुए 24 घंटे क्रियाशील होने के कार्य सौपे गए है।  इसी तरह उपखण्ड मजिस्ट्रेट, जिला पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग एवं विकास अधिकारी  द्वारा बाल विवाहों की प्रभावी रोकथाम के लिए तहसील स्तर पर संबंधित प्रत्येक ग्राम की एक एक प्रशासनिक समिति के गठन कर विधि विरूद्ध होनेवाले बाल विवाहों पर नजर रखते हुए सक्षम अधिकारी को अविलम्ब सूचना देने का दायित्व निर्धारित किया गया है। 

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