ज़रा संभल कर!

 इदरीस सिद्दीकीकिसी को भी अपने देश से एक अन्य देश में आप्रवासन के लिए अनेक बातें सोचनी पड़ती हैं। फिर भी कहीं न कहीं चूक हो ही जाती है। कनाडा आप्रवासन के लिए कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। एक आवेदक को अपनी शिक्षा और अनुभव आदि के आधार पर पॉइंट्स मिलते हैं। उन्ही पॉइंट्स के योग से उस की आप्रवासन की पात्रता तय होती है।शिक्षा और अनुभव का बहुत महत्त्व होता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप्रवासन के लिए आवेदन किस श्रेणी में किया जा रहा है। अनेक लोग उच्च शिक्षा ले कर कनाडा आये। उन्हें आप्रवासन के लिए शिक्षा के अधिकतम पॉइंट्स मिल गए। उन की आप्रवासन की सफलता का कारण सिद्ध हुई उच्च शिक्षा।अजीब हास्यप्रद स्थिति होती है कि आप ने भले ही शिखर संस्थान से शिक्षा प्राप्त की हो अपने देश में। वह यहां आते ही शून्य हो जाती है। लेकिन किसी ने आप्रवासन नहीं बल्कि उच्च संस्थान जैसे आईआईटी से प्राप्त की। फिर भारत में ही किसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में कार्य का अनुभव पाया। और कनाडा में भारत से ही नौकरी के लिए आवेदन दे कर चयनित हुए। तब आप यहां आ कर अच्छी नौकरी करते हैं। फिर तीन वर्षों के बाद आप्रवासन करते नागरिक बन सकते हैं। है न यह विचित्र कि यह क्रम उल्टा होने पर परिणाम, नौकरी में आने का, शून्यात्मक होता है!लेकिन अपने नए देश में जब नौकरी के लिए प्रयास शुरू किये। तब उन्हें निराशा होने लगी। थोड़े दिनों में ही यह बात समझ में आ गयी । उन की शिक्षा ने आप्रवासन के लिए ही द्वार खोले हैं। कनाडा में लैंड करते ही उनकी शिक्षा और अनुभव दोनों ही शून्य हो जाते हैं! अब यदि नौकरी चाहिए तो कनाडा या अमेरिका से अपनी शिक्षा को अपग्रेड करना होगा। अन्यथा नौकरी के द्वार नहीं खुलेंगे।यह बात कही लिखी हुई नहीं हैं। तभी तो कनाडा पहुंचने के पश्चात ही पता चलता है। कितने ही लोगों के लिए बहुत देर हो चुकी होती है। वे उम्र के उस पड़ाव पर होते हैं जब पुनः पढ़ने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं Iभारत सरीखे देशों से कनाडा आ कर बसने वालों में प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टरों, इंजीनियरों आदि की स्थिति कही ज़्याद गंभीर हो जाती है। उन्हें यह तो पता होता है कि आप्रवासन के पश्चात अनेक परीक्षाएं पास करनी होंगी अपने ही क्षेत्र में काम करने अथवा नौकरी पाने के लिए।किन्तु उन्हें इस के कुछ पेंच नहीं ज्ञात होते हैं। केवल परीक्षा पास करने से ही उन्हें अपने मैदान में कार्य मिलने की सम्भावना ध्वस्त हो जाती हैं। जब अन्य तथा निहित शर्तें पूरी करना उन के बस की बात नहीं होती है। एक डॉक्टर को जैसे रेजीडेंसी नहीं मिलना कि "अतिरिक्त" स्थान नहीं हैं। लीजिये परीक्षाएं उत्तीर्ण करना धरा रह गया ना ?कहते हैं कि कनाडा में जितने उच्च शिक्षित मज़दूरी कर रहे हैं। उतने अन्य किसी देश में नहीं मिलेंगे। क्या आप ने मेडिकल डॉक्टरों और इंजीनियरों को टैक्सी चलाते या फैक्ट्री में मज़दूरी करते देखा है ? यदि नहीं, तो यहाँ देख सकते हैं ! तभी तो कहते हैं, ज़रा संभल कर!

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