ताइवानी तरबूज की खेती से 65 दिनों में फसल तैयार

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पारंपरिक खेती के साथ किसान आधुनिक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। मेंथा, केला, टमाटर और स्ट्राबेरी के साथ किसानों को अब ताइवानी तरबूज और खरबूजे की खेती काफी भा रही है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा होने के चलते जिले में हर साल तरबूज की खेती का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। ताइवानी तरबूज की मांग प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में काफी ज्यादा है। जिसके चलते किसानों की तरबूज की फसल हाथो-हाथ बिक जाती है।देसी तरबूज के मुकाबले ताइवानी तरबूज का उत्पादन काफी ज्यादा होता है। इसी के चलते इस समय जिले में पहले के मुकाबले सैकड़ों हेक्टेयर ताइवानी तरबूज की खेती में इजाफा हुआ है। जिले के जैदपुर, रामनगर, सूरतगंज, हैदरगढ़ समेत दूसरे ब्लाकों में इसके काफी काश्तकार हैं। 65 दिन में ताइवानी तरबूज की फसल तैयार करके किसान अपनी आय बढ़ा रहे हैं। ताइवानी तरबूज की खेती में सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की भी जरूरत नहीं होती। इसलिए जिन इलाकों में पानी की दिक्कत है वहां के किसान तरबूज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। स्वाद में भी देसी तरबूज के मुकाबले ताइवानी तरबूज काफी कुरकुरा और मीठा होता है।वहीं पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा ने बताया कि ताइवानी तरबूज की एक एकड़ की फसल में 60 हजार की लागत में तीन लाख का मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले लोग गेंहू और धान के अलावा दूसरी किसी फसल के बारे में जानते तक नहीं थे। लेकिन अब जिले में एक नई क्रांति आई है। जिससे लोग इस तरह की फसल से कम लागत में जमकर मुनाफा कमा रहे हैं।

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