सातवें चरण में जातियों की जमीन तलाशने की कवायद शुरू

प्रदेश में छः चरणों के लोकसभा चुनाव सकुशल सम्पन्न होने के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपना पूरा जोर अब सातवें चरण में लगा दिया है।। इस राउंड में पूर्वांचल की जिन सीटों पर चुनाव होना है ,उसमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 महेंद्र नाथ पांडेय का संसदीय क्षेत्र चंदौली भी है। क्षेत्रीय दलों में अपनी अपनी जाति का नेता साबित करने की होड़ मची हुई है। सही मायने में जाति आधारित राजनीति करने वाले क्षत्रपों का इसी चरण में लिटमस टेस्ट होगा। जाति आधारित राजनीति पर बने अपना दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, जन अधिकार मंच पार्टी और निषाद पार्टी के नेताओं का भविष्य भी यह चुनाव तय करेगा। चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि प्रदेश की राजनीति जातियों के जुगाड़ से चलेगी या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल पर चलेगी। जन अधिकार मंच पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया है। एनआरएचएम घोटाले के आरोपी बसपा शासनकाल में मंत्री रहे बाबूसिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या कुशवाहा चंदौली लोकसभा सीट से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी हैं। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और गठबंधन प्रत्याशी संजय चौहान की कड़ी चुनौती है। चंदौली लोकसभा सीट पर कुशवाहा,मौर्या, चौहान ,यादव जाति के मत निर्णायक भूमिका में हैं।अपनी जाति के सहारे चुनाव मैदान में उतरी जन अधिकार पार्टी के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। एक तरफ जहां यहां का चुनाव बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के कद व प्रतिष्ठा से जुड़ा है तो वहीं बाबूराम कुशवाहा की पार्टी के अस्तित्व को बचाने की कवायद भी है। यदि उनकी पार्टी चंदौली से चुनाव जीतती हैं तो उनको संजीवनी मिलेगी, पर शिकस्त मिलने पर पार्टी की राजनीतिक उड़ान में रुकावट आ जायेगी। दूसरी तरफ सपा-बसपा गठबंधन के लिए भी यह सीट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पूर्व सपा सांसद रामकिसुन का टिकट काटकर डॉ संजय सिंह चौहान को गठबंधन ने अपना प्रत्याशी बनाया। चौहान वोटरों को साधने की जुगत में गठबंधन का यह निर्णय कहीं यादवों के क्षेत्रीय व जमीनी नेता रामकिसुन की उदासीनता के कारण गलत न साबित हो जाये। बताते चलें कि रामकिसुन को इस क्षेत्र में यादवों का बड़ा नेता माना जाता ह ऐसे में अगर चौहान वोटरों को गठबंधन प्रत्याशी ने अपनी तरफ कर लिया तो भी उनके लिए यह सीट आसान होती नहीं दिख रही है। बीजेपी, सपा-बसपा गठबंधन व जनाधिकार पार्टी प्रत्याशी के स्टार प्रचारकों का आगमन अभी जनपद में होना है। इसके बाद मतदाताओं के रुझान में कितना परिवर्तन होगा यह तो मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,अखिलेश यादव, मायावती सहित अभी कुछ और नेताओं के जिले में आने का कार्यक्रम है। ऐसे में जाति आधारित चन्दौली लोकसभा क्षेत्र के जातिय समीकरण को भुनाने में कितना सफल हो पाते हैं राजनीतिक दल यह तो भविष्य के गर्त में हैं फिलहाल अभी त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है। अगर इन समीकरणों को देखा जाये तो भले ही जीत किसी की हो पर इतना तो स्पष्ट है कि जीत-हार का अंतर कम ही होगा।

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