दिन में रौद्र रूप शाम को शांत हुई घाघरा नदी

नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण घाघरा नदी एक बार फिर उफान पर है। शनिवार को दिन में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर तक ऊपर जाने के बाद शाम को पानी कम होने लगा और रात दस बजे पांच सेमी. कम हो गया। जिला परियोजना प्रबंधक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 19 सेमी ऊपर बहते हुए उतार पर है। सूत्र बताते हैं कि घाघरा नदी ने शुक्रवार से बढ़ना शुरू कर दिया था। शनिवार को दोपहर में यह खतरे के निशान से 24 सेमी ऊपर बहने लगी, किन्तु दोपहर बाद पानी कम होने लगा। बताते हैं कि कटान की जद में बसे नकहरा, काशीपुर, बेहटा, चरपुरवा, परसावल, नैपुरा, बांसगांव गांव पर खतरा मंडराने लगा है। नदी ने चरपुरवा, बेहटा, परसावल के पास से करीब सैकड़ों बीघे से अधिक कृषि योग्य भूमि काटकर धारा में समाहित कर लिया है। घाघरा नदी बेहटा से लेकर नैपुरा तक बांध से टकराने लगी है। बरसात की वजह से बांध पर आए रैंनकट्स की वजह से बांध भी कई जगहों पर कमजोर हो चुका है। घाघरा के इस रूख को देख ग्रामीणों में दहशत है और ग्रामीण एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आने के लिए सशंकित हैं। अभी तक निर्माणाधीन रिंग बांध का काम भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में अगर जलस्तर बढ़ता है तो एक बार फिर से इलाके पर बाढ़ के बादल छा सकते है। हालांकि राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। नालों के सहारे कुछ मजरों में पानी घुस गया है किन्तु स्थिति कोई भयावह नहीं है। ऐसा सामान्यतया प्रति वर्ष होता रहता है। जिला प्रशासन की तरफ से सभी ऐहतियाती उपाय किए गए हैं। सभी बाढ़ चैकियां सक्रिय हैं। नियंत्रण कक्ष संचालित है। नियमित सूचनाएं प्राप्त की जा रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया बेलसर के ऐली परसौली गांव का प्राथमिक विद्यालय केवटाही घाघरा की जद में आ गया था। विद्यालय का एक हिस्सा कटकर नदी समा गया है, किन्तु यहां पढ़ाई नहीं हो रही थी। यहां के बच्चों को पहले से ही पड़ोस के विद्यालय में भेज दिया गया था। न्याय पंचायत प्रभारी शिव प्रसाद ने बताया कि नदी के खतरे को देखते विद्यालय में पढ़ाई पिछले 15 दिन नहीं कराई जा रही थी। बच्चों को अलग सुरक्षित स्थान पर पढ़ाया जा रहा था। प्रभारी प्रधानाध्यापक विपिन कुमार ने बताया कि अधिकारियों को इसकी सूचना पहले दी जा चुकी है।

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