मनुष्य का मित्र और कृषकों के लिए अमृत समान है चमगादड़

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चमगादड़ प्राकृतिक रचना का एक ऐसा अनूठा जीव है, जो मनुष्य का मित्र और कृषकों के लिए अमृत समान है, क्योंकि फसलों में लगने वाले कीटाणुओं का भोजन करना और मल त्याग के रूप में जैविक खाद देना, जहां कृषकों के लिए लाभकारी है, तो वहीं मच्छरों को खत्म करके, शरीर से ऐसी गंध छोड़ना जो मनुष्य को हानि पहुंचाने वाले वायरस को नष्ट कर देता है तो इस प्रकार चमगादड़ मनुष्य को भी लाभ पहुंचाने वाला जीव है। भारत में प्राचीन काल के समय और वर्तमान समय में क्षेत्र विशेष के अंतर्गत चमगादड़ को अशुभ माना जाता है, जबकि बौद्ध देशों में फेंगसुई मान्यता के अनुसार यह सुख और समृद्धि तो लाता ही है, मनुष्य को दीर्घायु भी बनाता है। शुभ माना भी क्यों ना जाए,चमगादड़ का पर्यावरण संतुलन और पारस्परिक निर्भरता के क्रम में विशेष महत्व जो है,चमगादड़ जहां मानव के लिए मित्र है,तो वही कृषकों के लिए अमृत समान है,चमगादड़ पेड़ों पर उल्टा लटककर जीवन जरूर गुजारता है, किंतु सृष्टि में उसके जो भी कार्य हैं, वह सारे कार्य मानव मात्र के लिए सीधे हैं। अयोध्या जनपद के बोधी तिवारी पुरवा से लगे एक घने वृक्ष पर हजारों की संख्या में कॉलोनी बनाकर चमगादड़ रहते हैं और इसी कारण वहां के चौराहे पर स्थित बाजार का नाम गदूरही बाजार पड़ गया है, किंतु आसपास की जनता का कहना है कि यह चमगादड़ इतनी बड़ी संख्या में होने के बावजूद किसी के लिए, किसी भी प्रकार से हानिकारक साबित नहीं हुए हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार चमगादड़ ऐसे कीड़े-मकोड़ों और मक्खियों को खा जाते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस संदर्भ में एक घटना का जिक्र अहम हो जाता है। काफी समय पहले अजंता-एलोरा की गुफाओं से चमगादड़ों को भगा दिया गया था। इसका कारण यह डर था कि वे वहां के चित्रों को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन इसका उल्टा परिणाम देखने को मिला था। इन गुफाओं के आसपास की फसलों में कीड़े लगने लगे और वे बर्बाद होने लगीं बाद में जब चमगादड़ फिर आ गए तो फसलों की स्थिति में सुधार हुआ क्योंकि चमगादड़ के मल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो जैविक खाद का काम करते हैं। कृषि क्षेत्र को और एक लाभ है कि फलाहारी चमगादड़ पेड़ों पर ही या अपने अड्डे पर फल लाकर खाते हैं।ऐसे में जब ये उड़कर एक पेड़ से दूसरे पेड़ या किसी अन्य स्थान पर जाते हैं तो रास्ते में कई बार फलों के बीज गिर जाते। इस प्रकार ये आम, अमरूद के बीजों के फैलाव में सहायक होते हैं। माना जाता है घर में होने पर चमगादड़ मच्छरों को भी खत्म कर देते हैं। अध्ययनों के अनुसार चमगादड़ एक बार में अपने शरीर के भार के बराबर मच्छर खा सकते हैं। छोटे भूरे चमगादड़ एक घंटे में लगभग 500 मच्छर खा सकते हैं. कई अन्य अध्ययनों में सामने आया है कि चमगादड़ों के शरीर से जो गंध निकलती है, वह कई ऐसे वायरस को नष्ट कर देती है, जो मनुष्य के लिए हानिकारक होते हैं। इस प्रकार बोधि तिवारी पुरवा के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के निवासी तो सुरक्षित है ही साथ ही वहां जैविक खेती भी हो रही है, क्योंकि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के उपयोग की आवश्यकता क्षेत्रवासियों को कम से कम ही पड़ रही है।

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