आगरा उपचुनाव रविवार को होगा मतदान,प्रत्याशियों की किस्मत होगी EVM में कैद

आगरा की उत्तरी विधानसभा सीट हमेशा से शहर की हिट लिस्ट में रही है,कोंग्रेस से भाजपा ने ये सीट ऐसी छीनी की फिर कोई राजनीतिक दल इसे भाजपा से वापस नहीं ले सका।इस उपचुनाव में सभी दाल इस सीट पर कब्जा करने को एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है,ताकि भाजपा की जीत का सिलसिला तोड़ा जा सके जबकि भाजपा इतिहास दोहराने को मैदान में उतरी है आगरा की उत्तरी विधान सभा हमेशा से ही पार्टियों के लिए सबसे खास रही है।शायद यही कारण है कि हर बार के चुनावों में कोंग्रेस से लेकर भाजपा सपा और बसपा तक इस सीट पर अपने सबसे मजबूत प्रत्यशी को मैदान में उतार चुकी है लेकिन सत्यप्रकाश विकल से लेकर अभी तक ये इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा,1998 से 10 अप्रैल 2019 तक इस सीट पर भाजपा के 5 बार के विधायक जगन प्रसाद गर्ग का कब्जा रहा लेकिन 10 अप्रैल को उनकी मौत के बाद खाली हुई सीट पर 19 मई को चुनाव होना है।जिसमे गठबंधन ने पूर्व विधायक मधुसुदन शर्मा के बेटे सूरज शर्मा पर दांव खेला है तो वही कांग्रेस ने रणवीर शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है,जबकि भाजपा ने 4 दशकों से पार्टी की सेवा कर रहे पुरषोत्तम खंडेलवाल को मैदान में उतारा है,तीनो प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी है और हर कोई अपनी अपनी जीत के दावे कर रहा है।ये वैश्य बाहुल्य सीट कही जाती है।लेकिन ब्राह्मणों की संख्या भी कम नही,तो दलित वोटर भी हर जीत में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है अब बात अगर महागठबंधन की करे तो सपा के पूर्व विधायक मधुसुदन शर्मा लंबे समय से पार्टी से जुड़े है और लोगो के बीच अच्छी छवि रही है लेकिन उनके बेटे सूरज शर्मा शहर के लोगो के लिए नया चेहरा है विदेश से पढ़कर लौटे सूरज शर्मा  युवा होने के नाते काफी जोश में दिखाई दे रहे है और युवाओं को साथ लेकर चल रहे है साथ ही बसपा और सपा के कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग भी मिल रहा है।जगह जगह मिल रहे युवाओं के समर्थन से वो भी गदगद है और अपनी जीत को लेकर आस्वस्त नज़र आ रहे है जबकि  कोंग्रेस ने इस सीट से रणवीर शर्मा को अपना प्रत्यशी बनाया है जो छात्रराजनीति से कांग्रेस से जुड़े रहे है,और पार्टी में कई पदों पर रहे,रणवीर सिंह भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर लोगो को कोंग्रेस की तरफ मोड़ने की कवायदों में जुड़े है ताकि इस बार इस सीट पर कॉन्फ्रेंस का कब्जा हो सके,आपको बता दें कांग्रेस इस सीट पर करीब 4 दशकों से वनवास भोग रही है लेकिन कांग्रेस दूसरे और लगातार 3 बार से तीसरे और चौथे नम्बर से ऊपर नही उठ पा रही,लेकिन इस बार जीत के दावे किए जा रहे है अब बात अगर भाजपा प्रत्याशी पुरुषोत्तम खंडेलवाल की करे तो उत्तरी विधानसभा ही नही अब तक जितने चुनाव हुए पार्टी के लिए जी जान से लगे रहे और एक कार्यकर्ता की तरह पार्टी को ऊपर उठाने में कोई कोर कसर नही छोड़ी।लेकिन इस बार वो खुद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है जिसके चलते उनकी चुनोतियाँ भी कम नही है।क्योंकि दुसरो को चुनाव लड़ाना और लड़ना दोनो ही अलग अलग बात है।पुरुषोत्तम खंडेलवाल को भी लोगो का पूरा समर्थन मिल रहा है और भाजपा इस सीट पर इतिहास दोहराने के दावे कर रही है लेकिन इस बार जीत इतनी आसान नज़र नहीं आती क्योंकि सूरज शर्मा को भी ब्राह्मण समाज के समर्थन के साथ अन्य समाज का भी समर्थन मिल रहा है।तो रणवीर शर्मा भी सभी का समर्थन मिलने के दावे कर रहे है,ये समर्थन वोट में कितना बदल पता है ये 23 मई को होने वाली मतगड़ना  के बाद पता चल सकेगा

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