किसान कपास की बुवाई के पूर्व खेतों की जुताई में जुटे

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बोरुंदा कस्बे सहित आस पास के कृषि क्षेत्रों में किसान कपास की बुवाई के पूर्व खेतों की जुताई करने में जुटे हुए है। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को कपास की उन्नत खेती करने की जानकारी दी जा रही। कृषि विभाग पर्यवेक्षक अशोक कुमार डौसी ने कपास की उन्नत खेती करने की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा की फसल चक्र, खेत की तैयारी, भूमि उपचार, देशी -कम्पोस्ट खाद का प्रयोग, कपास की किस्म का चुनाव, बीजोपचार,सन्तुलित मात्रा मे पोषक तत्व व उर्वरक का प्रयोग ,समय पर बुवाई,पौधे से पौधे की दुरी व कतार से कतार की दुरी, बुवाई के बाद पौधों की छंटाई फसल उत्पादन वृद्धि की महत्वपूर्ण तकनीक है।कपास बुवाई का उपयुक्त बी.टी कपास का बुवाई का समय 1मई से 20 मई तक है। बीकानेरी नरमा का बुवाई का समय 15 अप्रेल से 15 मई है।साधारणतया: मई माह मे बुवाई कर सकते है।कपास फसल की अच्छी उपज के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड अनुसार उर्वरक खाद प्रयोग किया जाना चाहिए। सामान्यतःबी.टी.कपास के लिए नत्रजन की मात्रा सिफारिश है एक तिहाई बुवाई के समय तदपश्चात एक तिहाई मात्रा विरलीकरण के समय प्रथम सिचाई के साथ व शेष मात्रा कलियां बनते समय सिचाईं के समय दी जाय।साथ मे पोटेशियम नाइट्रेट दो प्रतिशत की दर दो पर्णीय छिडकाव चरम पुष्पन अवस्था एवं टिण्डे बनने की अवस्था पर करना चाहिए।फास्फोरस की पुरी मात्रा बुवाई के समय देना चाहिये। यदि उर्वरक सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग किया जाता है तो बेहतर है वरना 250 किग्रा.जिप्सम प्रति हेक्टर भूमि मे दी जानी चाहिए। बी.टी.कपास मे बूंद बूंद सिचाई एव प्लास्टिक मल्च का प्रयोग फायदेमंद होता है।समय पर कपास की बुवाई करते समय उन्नत कृषि तकनीकी को अपनाने से फसल उत्पादकता मे बढोत्तरी होती है । जिन मृदाओं मे जिंक तत्व की कमी है वहां गेहूं व कपास फसलक्रम मे कपास फसल की अधिक उपज के लिए जिंक सल्फेट मोनोहाइडेट 7.6 किग्रा. प्रति हेक्टर या जिंक सल्फेट हेप्टाहाइडेट 12 किग्रा. प्रति हेक्टर अन्तिम जुताई के समय भूमि में दिया जाना चाहिए ।मृदा स्वास्थ्य परीक्षण मे कमी हो तो इस तत्व को देने से फसल उत्पादन मे वृद्धि होती है। जड़ गलन की समस्या वाले खेतों मे बुवाई से पूर्व भूमि उपचार किया जाना चाहिए। 24 किग्रा. व्यापारीक जिंक सल्फेट प्रति हेक्टर की दर से भूमि मे मिलावें।जिन खेतो मे जड़ गलन का प्रकोप अधिक है उन खेतो मे बुवाई पूर्व ढाई किग्रा. ट्राइकोडर्मा हरजेनियम को 200 किलो आदर्ता युक्त गोबर की खाद (एफ.वाई.एम.) मे अच्छी तरह से मिलाकर भी प्रति हेक्टर भी प्रयोग किया जा सकता है।

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