आज भी अधूरा है जैतपुर का जुगल किशोर का मंदिर

जैतपुर कस्वे के बाजार के पास सड़क के किनारे एक इमारत खड़ी है ।देखने से ये भव्य मन्दिर दिखाई देता है । जिसकी छाप और प्राण प्रतिष्ठा आज तक नही हुई  है ।इतिहासकार बताते है । इस संबंध में एक किवदंती है ,कि महाराज छत्रसाल के साथ उनकी रानी कमलावती पधारी उन्हें जैतपुर बहुत पसंद आया ।उन्होंने महाराज से निवेदन किया कि महाराज यहां पन्ना की तरह विशाल जुगल किशोर का मंदिर बनवाया जाए । ताकि आपका नाम रहे । आप कृष्ण उपासक है ,  इस पर महाराज छत्रसाल बड़े प्रभावित हुए ।और उन्होंने मन्दिर बनवाने की आज्ञा दे दी । मंदिर का कार्य तो पूरा हो गया ।परन्तु पुजारियों के आवास शेष थे । मंदिर की चहार  दिवारी बनाते समय एक घटना घट गई । किसी कारीगर ने किसी बालिका के साथ मंदिर के अन्दर कुकृत्य कर डाला । महारानी को जब इसकी जानकारी हुई तो काम बंद करवा दिया गया । पंडितों ने मूर्ति स्थापना का विरोध किया । और बोले कि यह मन्दिर अपवित्र हो गया है । इसमें प्रतिष्ठा नही होगी । तभी से ये इमारत  जो मंदिर की कला का एक नमूना है , वीरान हो गया । वर्तमान में यहां सरकारी बीज गोदाम चल रहा है

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