योगेश के बागी तेवर से डूबेगी रीता की नैय्या, गठबंधन के राजेंद्र पटेल के सर बंधेगा सेहरा

प्रयागराज की इलाहाबाद संसदीय सीट से सभी सियासी दलों के राजनेता अपने अपने कसौटी पर जीत का दंभ भर रहे हैं। लेकिन अगर जनता के मूड की बात की जाए तो इस बार क्षेत्र की जनता के दिमाग में कुछ और ही चल रहा है। सबसे पहले अगर बात की जाए बीजेपी पार्टी की तो रीता बहुगुणा जोशी का नाम सामने आता है जिसको लेकर रीता जोशी को भी मालूम है कि इस बार गठबंधन से पार पाना कम मुश्किल भरा है जितना उनकी ही पार्टी में अंदरूनी कलह साफ दिखाई देती है। क्योकि रीता बहुगुणा जोशी अपने पिता की विरासत के तौर पर इलाहाबाद संसदीय सीट को अपना मान रही हैं। स्वर्गीय हेमवतीनंदन बहुगुणा जी को इलाहाबाद की जनता का प्यार और दुलार सदैव मिलता था। 1984 के लोकसभा चुनाव में पराजय ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। बाद में उनका निधन भी हो गया, लेकिन हेमवतीनंदन बहुगुणा जी की पैठ सीधे जनता में थी और कभी उन पर दर बदलू की मुहर नही लगी। जिसके बाद वोटर रूपी जनता ने उन्हे सिर माथे पर बिठाए रखा। अब पिता की विरासत को अपना कहने वाली रीता बहुगुणा जोशी का इस सीट को लेकर पेंच फंसता नज़र आ रहा है। बीजेपी के पुराने और दिग्गज कार्यकर्ताओं को रीता जोशी का कांग्रेस प्यार दिखने से नाराज़गी है। तीसरे रीता जोशी पुरानी कांग्रेसी नेता थीं। अब रीता जोशी धीरे धीरे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कर रही हैं जिससे बीजेपी के पुराने और कर्मठी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। क्योकिं जिस तरह से रीता जोशी कांग्रेसी नेताओं को जोड़ रही हैं उससे अंदर ही अंदर नाराज़गी भी है। कांग्रेस में शामिल हुए योगेश शुक्ला प्रत्याशी है इलाहाबाद संसदीय सीट से और इनकी भी राह आसान नही है। इनका मानना है कि बीजेपी में अपना सब कुछ खपा दिया जिसके बाद बीजेपी ने दूसरे दल से आए नेताओं को ही ज्यादा तरजीह दी। जैसे नंद गोपाल गुप्ता नंदी पहले बसपा में थे फिर कांग्रेस में गए और अब बीजेपी में है और कैबिनेट स्तर के मंत्री बने बैठे हैं। योगेश शुक्ला का यूं बागी बनकर लोकसभा चुनाव में उतरना सभी मालूम है। खासकर बीजेपी नेताओं को को अच्छी तरह से पता है कि योगेश शुक्ला क्यों नाराज होकर कांग्रेस का दामन थामे और अब उसी कांग्रेस से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। योगेश शुक्ला की पैठ करछना, मंडा, मेजा, के साथ सभी इलाहाबाद की ग्रामीण विधानसभाओं में जनता के बीच में अच्छी छवि के साथ बहुत अच्छी पैठ है। और ये बीजेपी उम्मीदवार रीता जोशी को भी मालूम है कि अगर उनका वोट कटेगा तो योगेश शुक्ला ही काट सकते हैं। योगेश शुक्ला इनका नुकसान इसलिए भी कर सकते है क्योंकि अपनी सभी जनसभाओं और जनसंपर्क में जनता के बीच जाकर बीजेपी छोड़ने का कारण और कांग्रेस का दामन थामने की बाते अधिकतर मंच से कही। अब ऐसे में अपने इस लाल को भी जनता सिर माथे बिठा रही है। जो इलाहाबाद से बीजेपी उम्मीदवार डाँ रीता बहुगुणा जोशी के वोट बैंक में तगड़ी सेंधमारी कर दिए हैं। और ऐसे में समझा जा सकता है कि इसका फायदा किसे मिल रहा है। फिलहाल रीता बहुगुणा जोशी की जीत में सबसे बड़े रोड़ा बनकर उभरे हैं, तो वो हैं योगेश शुक्ला। जिनकी पकड़ शहरी मतदाताओं में कम है लेकिन ग्रामीण वोटरों में पकड़ ज्यादा है। जिसका सीधा लाभ योगेश शुक्ला को वोट के रूप में मिलेगा। जो बीजेपी का वोट बैंक है। उसी में सेंधमारी करके वोट पाऐंगे योगेश शुक्ला। राजेंद्र सिंह पटेल गठबंधन के इलाहाबाद संसदीय सीट से उम्मीदवार है। लेकिन लोकसभा चुनाव में जनता से इनका उतना सीधा संवाद कभी नही रहा जो एक नेता की पहचान होती है। राजेंद्र पटेल को गठबंधन का प्रत्याशी बनाने के बाद सपा और बसपा के जो फिक्स वोट बैंक हैं उस वोटिंग के ज़रिऐ राजेंद्र पटेल को वोट मिले हैं। दूसरे योगेश शुक्ला और रीता बहुगुणा जोशी की टक्कर का फायदा राजेंद्र सिंह पटेल उठाने का काम कर रहे हैं। क्योकि गठबंधन का वोट एकतरफा इस प्रत्याशी को मिले हैं। जिसका फायदा इन्हे जीत की ओर अग्रसर कर रहा है। कयास ये लगाऐ जा रहे हैं कि अगर जनता का प्यार और दुलार पाने में जिस तरह से कांग्रेस के योगेश शुक्ला कर रहे हैं उस आधार पर बीजेपी के इलाहाबाद सीट के उम्मीदवार का हारना तय माना जा रहा है। ऐसे में गठबंधन के उम्मीदवार के जीत का ग्राफ देखने पर सबसे ऊपर नज़र आ रहा है। शहरी वोटरों पर बीजेपी की पकड़ ज्यादा मानी जा रही है लेकिन वोटिंग के रोज़ बढ़ते पारे और शहरी वोटरों का अपने घरों से कम निकलना बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन गया है। जबकि इलाहाबाद संसदीय सीट के ग्रामीण वोटरों ने शहरी वोटरों के मुकाबले ज़्यादा वोटिंग की। जिसका परिणाम ये रहा कि चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 51 फीसदी रहा। जिसमें ग्रामीण वोटरों के बूथों पर वोटिंग ठीक रही। कुल मिलाकर इलाहाबाद संसदीय सीट के इस महामुकाबले में बीजेपी की रीता बहुगुणा जोशी और योगेश शुक्ला की लड़ाई में गठबंधन के राजेंद्र सिंह पटेल को जीत का सहरा इस बार लोकसभा चुनाव में बंधने जा रहा है।

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