सैकड़ों नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ मदर मिल्क बैंक

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भारत में शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है। यहां हर साल 1,000 में से 37 नवजातों की किसी न किसी कारण से मौत हो जाती है। लेकिन इन मौतों की सबसे बड़ी वजह है कुपोषण। कुपोषण यानी बच्चो को सही से पोषण न मिल पाना। नवजातों को मां के दूध की सबसे अधिक जरूरत होती है। अगर किसी वजह से मां का दूध बच्चे को नहीं मिल पाता है, तो मुसीबत खड़ी हो जाती है। क्योंकि मां के दूध का कोई विकल्प नहीं होता। इस समस्या को दूर करने के लिए महात्मा गांधी चिकित्सालय में मदर मिल्क बैंक बनाया गया है, जहां महिलाएं दूध दान करती हैं। दुर्बल माँ और कमज़ोर सेहत के साथ दुनिया में आए नवजात बच्चे के लिए मदर मिल्क बैंक एक वरदान साबित हुआ है। भारत में शिशु मृत्यु की हालत चिंताजनक है. आंकड़ों के मुताबिक़ पैदा होने वाले एक हज़ार बच्चो में से 46 बच्चे असमय दम तोड़ देते है. उनके लिए ये दूध राम बाण औषधि है. मिल्क बैंक में अभी तक 6 लाख 50 हजार लीटर दूध माताओं ने दान किया है जिसमें से अधिकांश ग्रामीण महिलाएं हैं। मिल्क बैंक की ओर से बच्चों को करीब 23 हजार यूनिट माँ का दूध पिलाया जा चुका है। राज्य सरकार की ओर से शिशु मृत्यु दर को कम करने एवं कुपोषण के उन्मूलन के उद्देश्य से यहां फरवरी 2017 में आंचल मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई।

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