गांव की इस बेटी ने कर दिखाया ऐसा काम देखे वीडियो

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अपने दम पर सफलता हासिल करने वाली कई बेटियों ने देश में इतिहास रचा है और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण आंचल की महिमा चौधरी ने सीए में सफलता हासिल करके अपने गांव का मिथक तोड़ सभी को खुशी मनाने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल पूरा मामला जनपद शामली के थानाभवन ब्लॉक के गांव औरंगाबाद उर्फ गंदेवड़ा का है। जहां एक साधारण किसान सत्यवीर सिंह के घर में 24 नवंबर 1992 को जन्मी महिमा चौधरी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रामीण अंचल के स्कूलों से यूपी बोर्ड के हिंदी मीडियम से की, लेकिन बचपन से ही कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वाली महिमा ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद चंडीगढ़ जा कर सीए बनने का मन में ठान लिया। जब उन्होंने अपने घरवालों से इस बारे में बात की तो घरवालो ने महिमा को बाहर जाकर पढ़ाई करने से साफ इंकार कर दिया, लेकिन जिद की पक्की महिमा ने अपने घर वालों को विश्वास में लेकर अपनी सीए बनने की कड़ी प्रतिबद्धता जताई। जिसके कारण उनके पिता सत्यवीर ने महिमा की बात मान महिमा को 2010 में चंडीगढ़ में प्रोफेशनल करियर एकेडमी सीए बनने के लिए दाखिला दिला दिया और आज महिमा ने कड़ी मेहनत के बाद सीए बनकर सबको अपना लिया गया फैसला सही कर दिखाया। अब सीए बनने के बाद घर और गांव में खुशी का माहौल है। गांव के सभी लोग जो उसके पिता को बेटी के बाहर भेजने पर उन्हें तरह-तरह की बातें बताते थे। वही लोग आज उनके परिवार को और महिमा को बधाई देने उनके घर पहुंचे। आज से पहले इस गांव की किसी बेटी ने सीए में सफलता हासिल नहीं की। बेटी की इस सफलता पर जहां गांव के अन्य बेटियों को सीख मिली तो वही गांव का मिथक तोड़ने में भी महिमा ने सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड से हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने के बाद उन्हें सबसे बड़ी परेशानी इंग्लिश की हुई, लेकिन कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने इस पर भी सफलता हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा बैंकिंग सेक्टर कुछ बड़ा करने की। महिमा के घर में महिमा तीन भाई बहन है जिनमें से महिमा दूसरे नंबर की है सबसे बड़ी बहन की शादी हो चुकी है तो छोटे भाई की भी शादी हो चुकी हैं। घरवालों का कहना है कि उनका बेटा पढ़ाई में इतना अच्छा नहीं था पढ़ाई करने के लिए महिमा के भाई पर काफी मेहनत की गई लेकिन महिमा के भाई ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी पर आज उनकी बेटी ने उनके सपनों को पूरा कर दिया।

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