निर्जला एकादशी पर किया दान-पुण्य

निर्जला एकादशी निर्जला व्रत रख कर मनाई जाती है.इस दौरान लोगों ने खूब दान पुण्य किया.एकादशी को लेकर सुबह से मंदिरों में चहल-पहल रही.दान-पुण्य करने के लिए महिलाएं मंदिरों में पहुंची.किसी ने फल तो किसी ने जल संग्रह करने वाली वस्तुओं को दान में दिया.गर्मी को देखते हुए इस पर्व पर विशेषकर उन वस्तुओं का दान किया गया,जिसमें जल रखा जा सके.मिट्टी के बर्तन,बाल्टी,पंखे जैसी वस्तुएं दान में दी गई.इस दिन दान करने पर पुण्य मिलता है.इसके अलावा किसी जरूरतमंद की सहायता भी हो जाती हैं.इसलिए ऐसी वस्तुएं दी जाती हैं,जो इस मौसम में काम आ सकें.जिसको लेकर सुरीर कस्बे में जगह जगह मीठे पानी और शर्बत की व्यवस्था की गई.पंडित भूपेंद्र शास्त्री कहते हैं कि निर्जला एकादशी का महत्व हमारे शास्त्रों में दर्शाया गया है. दान-पुण्य की विशेष महत्व है.

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