जुम्मे के दिन इस सुरह को पढ़ने से दज्जाल से रहेंगे महफ़ूज़

जुम्मे को एक विशेष दिन माना गया है. अल्लाह तआला ने इस दिन दुनिया को बनाया और इसी दिन क़यामत आएगी. इस दिन के लिए ऐसे कई अमल है जिन्हें अंजाम देने से बंदा अपने अल्लाह से सवाब बटोर सकता है और अपनी आख़िरत का इंतेज़ाम भी कर सकता है. उनमें से एक अमल ऐसा भी है जिसको अंजाम देने से क़यामत के दिन दज्जाल के फ़ितने से महफ़ूज़ रहेंगे. क़ुरान का सुरह नंबर 18 सुरह "कहफ़" की जुम्मे को तिलावत करने की काफी फ़ज़ीलत बताई गई है. ये सुरह क़ुरान के 15वें पारह के आखिर में शुरू होता है. पैगम्बर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी उम्म्त से इस सूरह को हर जुम्मे के दिन पढ़ने की ताक़ीद की और फ़रमाया जो शख्स इस सुरह की 10 आयत को याद कर लेगा वह दज्जाल के फ़ितने से महफ़ूज़ रहेगा. साथ ही ये भी फ़रमाया कि जो शख्स इस सुरह को इस तरह पढ़ेगा जिस तरह ये नाज़िल हुआ तो वह उस बन्दे के लिए कयामत के रोज़ नूर होगा, और सुरह कहफ़ को पढ़ता है तो एक जुम्मे से दूसरे जुम्मे तक एक नूर उसके लिए चमकता रहता है.

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