कर्ज के बोझ तले दबे किसान की खुदकुशी के मामले में डीएम ने बैठाई जांच

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कुशीनगर जिले के कसया तहसील के धुरिया गांव में कर्ज के बोझ तले किसान ने गले में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली....किसान कर्ज को लेकर काफी दिनों से तनाव में था..उसने गांव में चलने वाले स्वयं सहायता समूह और सेठ साहूकारों से कर्ज ले रखा था लेकिन वह कर्ज चुका नहीं पा रहा था...कर्ज देने वाले उसपर लगातार दबाव बना रहे थे जिसके कारण वह अवसाद में चला गया और घर में फंदे से झूलकर उसने अपनी जा दे दी...किसान की आत्महत्या की सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मच गया...आनन फानन में पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया...बाद में कसया ज्वाईंट मजिस्ट्रेट भी मौके पर पहुंचे...जिला प्रशासन के अनुसार किसान के आत्महत्या करने वाली घटना नहीं है...डीएम का कहना है कि मृतक ने अपने कर्ज लेकर अपने चाचा से जमीन लिया लेकिन उसके चाचा ने बाद में वसीयत लिख दिया इसी के कारण वह अवसाद में चला गया और उसने खुदकुशी कर ली...जबकि परिजनों का कहना है कि उनका परिवार बेहद गरीब है और उनपर लगभग चार लाख का कर्ज था जिसे चुकाने का सामर्थ्य नहीं था...रोज - रोज के तकादों से तंग आकर आत्महत्या करना पड़ा...फिलहाल डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने का निर्देश देते हुए दोषियों पर कार्यवाही की बात कही है...।  कसया थानाक्षेत्र के धुरिया गांव निवासी किसान गोविन्द सिंह अपने घर के एक कमरे में रस्सी से लटकते हुए पाये गये थे...घटना की जानकारी होने पर पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी थी...सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव के कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था....इस मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतक के पुत्र मनीष ने पुलिस को तहरीर दिया की उनके पिता के उपर लाखों रूपये का कर्ज था ...गांव के स्वयं सहायता समूह और सेठ साहूकारों से कर्ज लेने के बाद वे कर्ज नहीं चुका पा रहे थे...कर्ज देने वाले लोग लगातार दबाव बना रहे थे जिसके कारण वे अवसाद में चले गये और उन्होंने खुदकुशी कर ली. लोगों का कहना है कि पत्नी की और अपनी बीमारी के कारण उन्होने गांव से ले कर दिल्ली तक अपने जाच पहचान के लोगों से लाखों रुपया कर्ज ले रखा था...कुछ दिन पूर्व गोविन्द ने आपरेशन भी कराया था जिसके कारण वे एक साल से घर पर बैठ गये...घर में चार लोगों के होने और रोजगार ना होने के कारण घर की माली हालत खराब हो गयी थी...खेती भी अधिक नहीं थी जिससे परिवार को खाने के लाले पड़ गये...आर्थिक तंगी और उपर से लाखों के कर्ज के चलते गोविन्द ने खुदकुशी कर ली ...। एक तरफ जहां परिजन कर्ज के बोझ के कारण खुदकुशी करने की बात कर रहे हैं तो वहीं जिला प्रशासन के अनुसार किसान के आत्महत्या करने वाली घटना नहीं है...डीएम का कहना है कि मृतक ने अपने कर्ज लेकर अपने चाचा से जमीन लिया लेकिन उसके चाचा ने बाद में वसीयत लिख दिया इसी के कारण वह अवसाद में चला गया और उसने खुदकुशी कर ली...फिलहाल जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच कराने के साथ ही कर्ज देने वाली माईक्रो फाईनेंस कंपनी के भूमिका भी जांच कराने का आदेश दिया है...।

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