जौनपुर मे बदमाशो का भय, तीन डाक्टरों से मांगी रंगदारी,पुलिस नहीं किया नाम का खुलासा

हॉस्पिटल चला रहे डॉक्टर से रंगदारी मांगना अपराधियों के लिए आम बात हो गई है। अधिकांश डॉक्टर भी मामलों को दबाते हैं।पुलिस भी एफआईआर तो दर्ज करती है लेकिन रंगदारी मांगने एवं डॉक्टरों के नाम का खुलासा नहीं करती है। आंकड़ों पर गौर करें तो 31 मई को जिन तीन डाक्टरों से रंगदारी मांगी गई उसमें भी एफआईआर दर्ज होने के बाद भी मामले को दबाएं रखा गया। इस बात का खुलासा पुलिस ने तब किया जब आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।बावजूद इसके उन डॉक्टरों के नाम का खुलासा नहीं किया गया जिनसे रंगदारी मांगी गई थी। एफआईआर की कॉपी कोर्ट में न पहुंचती तो यह भी न पता चल पाता कि किस डॉक्टर से रंगदारी मांगी गई। आखिर इसके पीछे वजह क्या है।लेकिन मामले को दबाने से अपराध बढ़ने लगा है। सूत्रों की मानें तो बदलापुर तहसील क्षेत्र के सिंगरामऊ थाना इलाके के रतासी चौराहा पर डॉ. संजय कुमार जो फार्मा क्लीनिक चलाते है। उनसे 31 मई 2019 को मोबाइल नंबर 7348299159 से फोन कर पांच लाख की रंगदारी मांगी गई। उनकी तहरीर पर दो जून को सिंगरामऊ थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। शहर के तारापुर कॉलोनी निवासी डॉ राजेंद्र प्रसाद बिंद जिनका लाइफ लाइन हॉस्पिटल पचहटिया में हैं उनसे 31 मई की सुबह 7948399159 से फोन कर दस लाख रंगदारी मांगी गई। डॉक्टर ने तीन जून को तहरीर दिया और एफआईआर दर्ज हुई। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के सीहीपुर मुरादगंज निवासी डॉ राजेंद्र प्रसाद यादव अपने मकान में ही देव हॉस्पिटल चलाते हैं। 31 मई 2019 को मोबाइल नंबर 7348299159 से फोन कर दस लाख रंगदारी मांगी गई। उनकी तहरीर पर एक जून को लाइन बाजार थाने में एफआईआर दर्ज हुआ। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों विनोद सिंह और सत्य प्रकाश श्रीवास्तव को तीन जून को ही सुबह में कुशहां मोड़ पर घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों की मानें तोऌ तणीनों डॉक्टरों को तीन दिन का समय आरोपियों ने दिया था। पैसा न देने पर डाक्टरों के क्लीनिक पर फायरिंग करने एवं सफल होने पर तीन और डॉक्टर से रंगदारी मांगने की योजना बनाई थी। मुन्ना बजरंगी के नाम पर मांगी थी रंगदारी जौनपुर मे तकरीबन दो वर्ष पूर्व ईशा अस्पताल के संचालक से बदमाशों ने दो करोड़ की रंगदारी मांगी थीं। उन्होंने पचास लाख से अधिक बदमाशों को चुपचाप थमा दिया। जब वह और अधिक डिमांड करने लगे तो मुन्ना बजरंगी से मिलने ईशा अस्पताल के संचालक जेल पहुंच गए। वहां मुन्ना बजरंगी ने रंगदारी मांगने से मना किया तो उनके होश उड़ गए। एसटीएफ ने घेराबंदी कर रामपुर इलाके के बदमाशों को दबोच लिया। लाखों रूपयों की बरामदगी भी हुई। पचास लाख बदमाशों को देने के बाद भी डाक्टर ने सिर्फ 15 लाख रूपये देने का केस लाइन बाजार थाने में दर्ज कराया था। तब से बदमाशों द्वारा डाक्टरों से रंगदारी मांगने की घटनाएं बढ़ी हैं।

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