नरसंहार से दहल गया था देश

ददुआ का रामूपुरवा कांड और ठोकिया का बगहियापुरवा सामूहिक नरसंहार याद कर लोग आज भी सहम जाते हैं। उस वक्त प्रदेश ही नहीं देश भी दहल गया था। इसी नक्शे-कदम में चलते हुए डकैत रागिया और बलखड़िया ने जनपद सीमा से सटे मध्य प्रदेश के बिछियन में एक दर्जन से अधिक लोगों को ¨जदा जला दिया था। बलखड़िया ने डोडामाफी में प्रधान परिवार के आधा दर्जन सदस्यों को गोलियों से भून दिया था। इन घटनाओं को मुखबिरी के शक में अंजाम दिया गया था। नहीं पनपने दिया मुखबिर तंत्र डकैतों ने पुलिस का मुखबिर तंत्र पाठा के जंगल में मजबूत नहीं होने दिया। पता चलते ही नरसंहार कर लोगों में इतनी दहशत भर दी कि फिर कोई उनकी सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सका। यही वजह है कि एक डकैत खत्म होने के बाद दूसरा सिर उठा लेता है।

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