खंडहर में तब्दील हुए लाखों की लागत से बने स्वास्थ्य उपकेंद्र

केंद्र ओर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही हो लेकिन जनपद के गांवों में आकर तमाम दावे हवाई साबित नजर आते हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वर्ष 2009 - 2010 में एनआरएचएम योजना से करीब सात लाख की लागत से बिजवाड़ा, कमाला, कैडवा, गल्हेता, बरनावा, तेडा, खपराना, सिरसली, मवीकलां, तितरोदा, फजलपुर आदि सहित 39 गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निर्माण कराया गया था। इनके निर्माण कराने का मकसद ग्रामीणों को समय पर टीकाकरण, प्रसव व प्रसव पूर्व सुविधा एवं अन्य प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराना था। लेकिन इनमें ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलना तो दूर कोई भी एएनएम या स्वास्थ्यकर्मी नही बैठता। जिस कारण रखरखाव के अभाव में ये उपकेंद्र खंडर में तब्दील हो चुके है। पिचोकरा में तो पशु बंधने शुरू हो गये और कमरों में भूसा भरा हुआ है। इस सबंध में बिनौली के संदीप धामा कहते हैं, कि उपकेंद्रों पर कभी किसी ग्रामीण को कोई सुविधा नही मिलती। पिचोकरा के वेदपाल कहते हैं, कि लाखों की लागत से बने इन केंद्रों में कोई स्वास्थ्यकर्मी नही बैठता। ग्लेहता के प्रवीण वालिया कहते हैं, कि उपकेंद्रों को जीर्णक्षीर्ण नशेड़ियों ओर जुआरियों ने अपना अड्डा बना लिया है। सीएचसी अधीक्षक बिनौली डॉ.अतुल बंसल कहते हैं, जिन गांवों के उपकेंद्र खराब हालत में है उनकी सूची बनाकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बागपत को भेजी गई है, बजट आने पर इनकी मरम्मत का कार्य कराया जायेगा और जिन उपकेंद्रों में एएनएम नही बैठती, जांच कर उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

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