रहस्य का विषय बना है रोग, योग से बनेंगे निरोग

विश्व के समस्त प्राणियों में रोग हमेशा से एक रहस्य का विषय बना रहा है। इसकी चिकित्सा भावना, अंधविश्वास एवं भय से सम्बद्ध रही । यहां तक की अंग्रेजी चिकित्सा (एलोपैथी चिकित्सा जगत) भी रोग को बाहर से आक्रमण करने वाली कोई चीज ही मानती है। ऐसा भी माना जाता रहा है कि रोग किसी उच्च शक्ति या ईश्वर के प्रति किए गए अपराध के दंड स्वरूप हमें मिला है। रोग के इस अवधारणा का लाभ उठाकर जादूगर, ओझा, सोखा, पुजारी एवं तंत्र-मंत्र के जानकार आदि रोग का भय दिखाकर हमेशा से हमें लूटते खसोटते रहे हैं, जबकि योग यह नहीं मानता!" उपरोक्त बातें केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन में चलने वाले निःशुल्क योग प्रशिक्षण के दौरान श्री मंसाराम गुप्त योग समिति की महिला चिकित्सक डॉक्टर शशिकला मोदनवाल ने श्रीमती गंगा देवी बालिका विद्यालय के प्रांगण में कही। योगाचार्य आनंद सिंह ने बताया कि रोग क्या है, वह आता कहां से है, उसका उद्देश्य क्या है, और किस अवसर पर आता है। शरीर में विजातीय द्रव्य की भरमार का प्रकटीकरण ही रोग है। फोड़े-फुंसियां अथवा दाने त्वचा मार्ग से, जुखाम नाक द्वार से, बुखार रूपी शरीर का कचरा त्वचा मार्ग से शरीर से बाहर निकलकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखने का प्रयास करती है। यह रोग नहीं बल्कि कुदरत द्वारा शरीर के दोषों को शरीर से बाहर निकालकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखने का प्रयास है। योगाचार्य आलोक कुमार सिंह ने शिथिलीकरण, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, वक्रासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी एवं उद्गीत प्राणायाम का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र कुमार खंडेलवाल ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। रवीश एडवोकेट, कैलाश मोदनवाल, उज्जवल मोदनवाल, भारती लता जायसवाल, विनीत पाण्डेय, क्षमा शर्मा, रजनी सोनकर, अनुजा केसरी आदि की उपस्थिति काफी सराहनीय रही।

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