परिवार नियोजन के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी आशा

मुरादनगर 20 जून , गरीबी में जीवन जीने वाले और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए परिवार नियोजन नये और सरल तरीकों को पहुंचाने में आशा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उक्त विचार आज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरादनगर पर आयोजित शहरी आशाओं की दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए *प्रशिक्षक प्रभा शर्मा* ने आशाओं के प्रशिक्षण में व्यक्त किये। *दर्द चैलेंज इनिशिएटिव फाॅर हेल्दी सिटीज* (टीसीआईएचसी) कार्यक्रम के अंतर्गत शहरी आशाओं की आज से दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरादनगर पर शुरू हुआ कार्यशाला के सम्बन्ध में *राज्य प्रशिक्षक प्रभा शर्मा एवं आशीष कुमार* ने बताया कि इसका उद्देश्य शहरी गरीब क्षेत्रों में परिवार नियोजन को सफल बनाने के लिए बेहतर सुविधाओं को पहुंचाना और लोगों को को जागरूक करना है। क्योंकि कुछ लोगों को यह भ्रांति होती है कि शहर के लोगों को सभी जानकारी होती है जबकि शहर की गरीब बस्तियों में परिवार नियोजन के साधनों की भी जानकारी का अभाव होता है इसलिए ही शहरी आशाओं और एएनएम को इस कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। आज कार्यशाला में परिवार नियोजन के क्रियान्वयन में आशा की भूमिका, परिवार नियोजन संबंधी चुनौतियां और बाधाएं, परिवार नियोजन का अर्थ और महत्व पुरुष और महिला के प्रजनन अंगों की रूपरेखा और कार्य, परिवार नियोजन के आधुनिक साधन तथा लैमविधि, पुरुष महिला नसबंदी आदि विषयों पर व्याख्यान, समूह चर्चा, परिचर्चा, अभ्यास आदि माध्यमों से आशाओं के साथ संवाद कर जानकारी दी गई। कार्यशाला के विषय में जानकारी देते हुए प्रभा शर्मा ने बताया कि *कार्यशाला में प्रमुख रूप से* सहभागी तथा अभ्यास युक्त चर्चा से प्रतिभागियों को विस्तृत जानकारी दी गई । परिवार नियोजन के साधनों के सतत प्रयोग पर ध्यान दिया जाये इस पर विशेष ध्यान दिया गया। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई । परिवार नियोजन के साधनों का भविष्य और वर्तमान में प्रयोग करने वालों को पहचानने में, मदद करने वालों और फालोअप की सेवाएं देने में उनकी क्या भूमिका है विस्तार से जानकारी दी गई । यह भी चर्चा की गई कि परिवार नियोजन के साधनों के प्रयोग करने वालों के साथ संवाद कैसे किया जाना चाहिए। प्रयोग कर्ताओं के निर्णय एवं बताये गये विकल्पों के प्रति कैसे संवेदनशील रहेंगे पर चर्चा की जा रही है । संचार के विभिन्न कौशलों का कैसे प्रयोग किया जाये पर चर्चा की जा रही है । कार्यशाला संवादात्मक हो, सहभागी हो, सुगमीकरण हो, तथा विभिन्न गतिविधियों से परिपूर्ण हो ऐसा प्रयास किया जा रहा है ।, कार्यशाला के लिए निर्धारित समय का सदुपयोग शत् प्रतिशत हो ऐसा सुनिश्चित किये जाने का प्रयास किया जाता है । , कार्यशाला को प्रभावी बनाने के लिए चर्चा, परिचर्चा, समूह चर्चा का भी प्रयोग किया गया । कार्यशाला के आयोजन में *पीएसआई से सिटी मैनेजर परवेज के निर्देशन में* प्रशिक्षण विधिवत् रहा। इस कार्यशाला में कुल 24 आशा और एएनएम प्रतिभाग कर रही है।

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