मुम्बई की सौगात है चांदी कारोबार

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कस्बे से करीब 11 किमी दूर छोटा कस्बा बिसावर, जो जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत भी है, घुंघरू कारोबार के लिए देशभर में जाना जाता है. आज करीब छह दशक पूर्व घुंघरू कारोबार की नींव रखी गई थी. तब से लगातार चांदी कारोबार से बिसावर की चमक बरकरार है. बिसावर पंचायत के गांव नगला शेखा के जवाहर सिंह बम्बई गये थे. वहां उन्होंने घुंघरू कारोबार को समझा और बिसावर में घुंघरू कारोबार को लाकर स्थापित किया. सत्तर के दशक में दो चार परिवारों के बीच कारोबार शुरू किया गया. वर्तमान में बिसावर क्षेत्र के पचास से ज्यादा गांव के सैकड़ों लोग चांदी और गिलहट कारोबार से जुड़े हुये हैं. दर्जनभर से ज्यादा लोगों ने चांदी और गिलहट के उद्योग स्थापित कर लिये हैं. इनसे सैकड़ों गरीब लोगों को रोजगार मिल रहा है. बाहर से कच्चा माल लाकर कारखानों में चांदी और गिलहट के घुंघरू तैयार किये जाते हैं. बिसावर के घुंघरू देशभर में जाने जाते हैं. बिसावर के घुंघरू देश के अधिकतर राज्यों में भेजे जाते हैं. इससे बिसावर के चांदी उद्यमियों को अच्छा मुनाफा हो जाता है. चांदी कारोबारी पुलिसिया संरक्षण की मांग लगातार करते आ रहे हैं. जानकार बताते हैं कि जब चांदी के भाव ऊपर होते हैं तो लोगों को अच्छी मजदूरी मिल जाती है. चांदी के रेट डाउन होते हैं तो मजदूरी कम हो जाती है.

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