ज़ुबाँ, ज़ायक़ा : यहां के पेड़े ने दिलाई मथुरा को पहचान

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वो नगरी जहां कान्हा ने लीलाएं कीं, जहां सात समंदर पार से भक्त खिंचे चले आते हैं, जहां की होली के रंग अलहदा है, लाठियों की मार में भी प्यार नजर आता है वहां का ज़ायक़ा भी हर किसी को भाता है. राधे राध. अबतक तो आप समझ ही गए होंगे कि इस बार हम 'ज़ुबाँ, ज़ायक़ा' के सफर पर आपको ले चलेंगे मथुरा का ज़ायक़ा चखाने. तो चलिए करते हैं सफर की शुरुआत. इस सफर में सबसे पहले आपको लेकर चलते हैं शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले होली गेट के समीप स्थित ओमा पहलवान की दुकान पर. यहां पर आपको कचौड़ी और जलेबी का स्वाद मिलेगा इस कचौड़ी को खाने के लिए नेता अभिनेता, हर आम और खास आदमी उतावला रहता है. ओमा पहलवान की कचौड़ी की दुकान लगभग 40 साल पुरानी है. यकीन मानिए एक बार अगर आप यहां की कचौड़ी खा लेंगे को बार-बार यहाँ खिंचे चले आएँगे. 

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