कुलपति डॉ राजकुमार ने जताई अपनी हत्या की आंशका पश्चिमी यूपी के माफियाओ को दी गई सुपारी

This browser does not support the video element.

रैगिंग को लेकर खासे सुर्खियो के बीच उत्तर प्रदेश के इटावा के सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ राजकुमार ने अपनी हत्या की आंशका जताई है। उन्होने सर्किल ऐप से वार्ता करते हुए कहा कि यूनीवर्सिटी मे सक्रिय माफियाओ की ओर से उनको लगातार इस तरह की धमकिया मिल रही है। उन्होने दावा किया कि पिछले दिनो मिली धमकी के बाद पुलिसिया पडताल मे यह बात सामने आई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सूटरो को यहॉ के माफियाओ ने सुपारी दी हुई है। यह जानकारी सामने आने के बाद उन्होने विभिन्न स्तर पर अपनी सुरक्षा बढाई है। धमकी के पीछे कुछ डाक्टरो और ठेकेदार माफियाओ की भूमिका मानी जा रही है। इस बाबत करीब 6 माह पहले सैफई थाने मे मुकदमा भी दर्ज कराया गया लेकिन अभी तक पुलिसिया पडताल ही चल रही है।  डॉ राजकुमार ने बताया कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के माफिया एवं दलालों की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं लेकिन वह उन से डरने वाले नहीं हैं वह कैंपस की पुरानी गंदगी को साफ करके रहेंगे। उनका कहना है कि चाहे जो कीमत चुकानी पड़े लेकिन वो अपने निर्णयो से पीछे हटने वाले नही है । ऐसा माना जा रहा है कि सैफई मेडिकल कालेज के कुलपति डॉ राजकुमार टैंडरों में बदलाव को लेकर निशाने पर आए है।एक जून 2018 को डॉ राजकुमार ने मेडिकल यूनिवर्सिटी में बाइस चांसलर के तौर पर ज्वाइन किया था। उसके बाद से वे वहां की तमाम व्यवस्थाओं को बदलने में लगे हुए हैं । बदलाव के कारण वर्षों से जमे हुए लोगों को उनके फैसले रास नहीं आ रहे हैं । उनका साफ तौर पर कहना है कि तमाम ठेकों में गड़बड़ियां चल रहीं थी भ्रष्टाचार चरम पर था जिसे बदलना जरूरी था । अब जब बदलाव किया जा रहा है तो प्रभावित लोगों को रास नहीं आ रहा है। उन्होने बताया कि 2006 से मेडिकल संस्थान के तौर पर चालू हुए सैफई मेडिकल यूनीवसिर्टी मे हर विभाग मे भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार नजर आ रहा है चाहे सुरक्षा एजेंसियों के ठेके, मैस के ठेके या फिर सफाई के ठेके को लेकर कुलपति ठेकेदारों के निशाने पर हैं । कुलपति का साफ तौर पर कहना है कि इस मेडिकल यूनिवर्सिटी में वर्ष है। बिना नवीनीकरण के मनमाने पैसे मैस के बढ़ा लिए जाते थे,छात्रों से यूनिवर्सिटी के लोग ही खाने के पैसे इकट्ठे करके ठेकेदारों को दे रहे थे। उन्होंने इस व्यवस्था में बदलाव किया है और हास्टलों छात्रों की एक कमेटी बना दी है जो मैस की व्यवस्था का संचालन करेगी। जो जितना खाना खाएगा उतना ही भुगतान करेगा। यह व्यवस्था लोगों को रास नहीं आ रही है। मेडिकल यूनिवर्सिटी में तमाम आरोपों में घिरे कई डाक्टरों को भी एक पटल से दूसरे पटल पर हटाया गया है। इसी को लेकर पर्दे के पीछे से कुछ डाक्टर भी स्थानीय लोगों को उकसाने में लगे हुए हैं।  15 सितंबर 2017 को मेडिकल छात्रों के द्वारा इलाज के दौरान एक मेडिकल छात्र की मौत को लेकर पूर्व कुलपति टी प्रभाकर के कार्यालय को तोड़ दिया गया था और उनके आवास पर घुस कर हमला किया गया था। इस हमले के बाद कुलपति टी प्रभाकर व उनकी पत्नी काफी घबरा गए थे। इस हमले के पीछे यूनिवर्सिटी के कई लोग मेडिकल छात्रों को उकसाने में बताए गए थे ।   सपा सरकार में सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में हमेशा पीएसी की एक प्लाटून तैनात रहती थी परंतु सपा सरकार जाने के बाद वहां से पीएसी प्लाटून को हटा लिया गया । पिछले वर्ष एक मेडिकल छात्र को गोली मारे जाने के बाद एसएसपी ने वहॉ पर पीएसी यूनिवर्सिटी के अंदर तैनात करने का भरोसा दिया था परंतु अभी तक पीएसी वहॉ नहीं भेजी जा सकी है। यूनिवर्सिटी की सुरक्षा के लिए पूर्व सैनिक कल्याण निगम के 250 कर्मचारी तैनात रहते हैं।

X

सर्कल इटावा
अपने शहर का अपना ऐप

इटावा, भरथना, जसवंतनगर, सैफई, चकरनगर… की हर खबर, वीडियो और भी बहुत कुछ! 👉

इटावा में 15000 से भी ज्यादा लोग हैं इस ऐप पर, आप भी इस सर्कल का हिस्सा बनें 👉

सर्कल ऐप
इंस्टॉल करें