देर से आना जल्दी जाना ऐ साहब ये ठीक नहीं-देखें पुरी खबर

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एक फिल्मी गाना है,देर से आना जल्दी जाना ऐ साहब ये ठीक नहीं जी हां कुछ ऐसा ही है बैरिया तहसीलदार की स्थानीय बैरिया तहसील में अधिकारी-कर्मचारी हमेशा कुर्सी से नदारद रहते हैं।अधिकारियों के कार्यालय में पहुंचने का कोई समय नहीं है न हीं जाने का समय निर्धारित है।यह आलम लगभग हमेशा देखने को मिलता है।हम बात कर रहे हैं बैरिया तहसील के तहसीलदार श्रवण कुमार राठौड़ आये दिन अपने कार्यालय से गायब रहते।यही कारण है कि तहसीलदार के अधिनस्थ भी यही सोचते हैं कि जब कार्यालय में साहब ही समय पर नहीं आते तो कर्मचारी भी गायब हो जाते हैं,तहसीलदार के अधिनस्थ चार बाबूओं की तैनाती है।शुक्रवार को बैरिया तहसील में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला तहसीलदार कार्यालय मे देखा गया तो तहसीलदार की कुर्सी खाली पड़ी हुई थी।वहीं जब तहसीलदार के बाबूओं को खोजा गया तो तो पता चला कि चार बाबू है,और कई दिनों से छुट्टी पर हैं।ऐसे बाबूओं की कार्यालय में भी सारी कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी।और वहां क्षेत्रीय लोगों व यूवा अपने-अपने कार्यों के लिए तहसीलदार के इंतजार में बैठे हुए थे।जब वहां पर मौजूद यूवाओं से पुछा गया तो उनका कहना था,हम लोग विगत कई दिनों से आर्थिक आधार पर समान्य आरक्षण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं।लेकिन यहां पर कोई कुछ सुनने वाला नहीं है।हम लोगों को कई जगहों पर समान्य आरक्षण प्रमाण पत्र की जरूरत है।जिसके वजह से हम लोग के स्कुलो व नौकरियों में प्रमाणपत्र के लिए काम रूका हुआ है।लेकिन हम लोग किससे कहें यहां पर न तो तहसीलदार साहब है और ना ही उनके कोई बाबू है।प्रतीदिन सुबह से शाम तक तहसील के चक्कर लगाकर थक गऐ है।तहसीलदार साहब अपने कार्यालय में बैठते नहीं है अगर कभी कुछ समय के लिए बैठते भी हैं तो हम लोगों की सुनते नहीं है,यही नहीं कुछ भी पुछने पर झल्ला कर बोल देते हैं।

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