झाड़ फूंक के चक्कर छोड़े, सांप के काटने पर जाए अस्पताल

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मौसम के बदलाव के साथ ही इन दिनों अस्पतालों में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है। सामान्य मरीजों के अलावा इन दिनों हुई बारिश के चलते सर्प दंश के मरीज भी काफी बढ़ते जा रहे हैं। सांप के काटने पर लोगों द्वारा उस जगह पर चीरा लगाना उतना ही खतरनाक साबित हो सकता हैं। जितना सांप का जहर फैलता है। इसलिए चीरा लगाने की बजाए प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद पीडि़त को अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झुंझुनूं के सुमन अस्पताल की बात करें तो साल के करीब 250 से 300 तक सर्प दंश के मामले आ रहे हैं। महीने के लगभग 40 रोगी सांप, बिच्छू आदि के काटने पर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।  डॉ. राहुल सुमन का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में मुख्यत: कोबरा यानि काला सांप तथा अन्य इलाकों में भूरे रंग का सांप के काटने के ज्यादा केस आते हैं। कोबरा सांप तो इतना जहरीला होता हैं कि काटने के तुरंत बाद उपचार नहीं मिला तो एक से डेढ़ घंटे में पीडि़त की मृत्यु हो सकती हैं। जुलाई-अगस्त में ज्यादा केस डॉ. राहुल सुमन की मानें तो अन्य महीनों की तुलना में जुलाई और अगस्त माह में सांप के काटने वाले केस ज्यादा आते हैं। क्योंकि बारिश के चलते सांप बिल से बाहर निकल जाते हैं। डॉ. सुमन ने बताया कि अस्पताल में प्रति वर्ष लगभग 250 से 300 लोग सांप के काटने पीडि़त आते हैं। अस्पताल में शेखावाटी क्षेत्र के अलावा हरियाणा के हिसार, भिवानी, नारनौल, नागौर सहित अन्य जगहों से सर्प दंश जैसे केस आते रहते हैं। झाड़ फूंक के चक्कर में पड़ रहे हैं लोग सांप जैसे जहरीले जानवारों के काटने पर लोग आज भी झाड़ फूंक वाले अंधविश्वास के चक्कर में पड़े हुए हैं। डॉ. सुमन ने बताया कि सांप के काटने के बाद अस्पताल की बजाए पीडि़त को झाड़ फूंक वाले स्थान पर ले जाते हैं। जहां कुछ दिनों के लिए पीडि़त का खाना व पानी बंद कर दिया जाता हैं। जिससे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। जब स्थिति बिगडऩे लगती हैं। तो फिर अस्पताल लेकर आते हैं। 

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