ट्रेनिंग के 6 माह बाद ही कारगिल की जंग में लिया था मोर्चा

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अनिल 1998 में इंडियन आर्मी में भर्ती हुआ हुए थे। उन्होंने बताया कि मुझे तोपखाना कोर मिला था नासिक में ट्रेनिंग किया। 6-7 महीने ट्रेनिंग किया था के मई 1999 में पता चला के कारगिल में वार छिड़ गई है। वहां जवानों की डिमांड थी हमारा ट्रेड रेडियो आपरेटर था। हमें वहां भेजा गया कारगिल में एक अलग ही माहौल था। हम जम्मू के स्टेशन पर पहुंचे किसी फौजी की टांग टूटी हुई थी किसी फौजी का हाथ टूटा हुआ था वो वहां पड़े थे। रात भर जम्मू में हार्ट किया फिर श्रीनगर भेज दिया गया। वहां भी रात भर हार्ट के बाद सोना मार्ग। मेरी बटालियन का नाम 158 मध्य तोप खाना जो एक बोफोर्स रेजीमेंट थी। मेरी रेजीमेंट चौबीसों घंटे फायरिंग पर थी। शाम के समय ऐसा लगता था के हजारों आग का गोला कोई आकाश में फेंक रहा है। हमारी यूनिट जब द्रास सेक्टर में थी उसमें हमारे एक कैप्टन और दो जवान शहीद हुए थे और सरकार ने मदद किया था। .

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