पूर्व अध्यक्ष पंचतत्व में विलीन

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भाजपा के जुझारू नेता व पूर्व अध्यक्ष इलाहाबाद विश्वविद्यालय लक्मीशंकर ओझा का बीते दिनों हनुमान मंदिर जाते समय एक्सीडेंट हो जाने की वजह से सर में गम्भीर चोट आ गई थी।जिससे वो कोमा में चले गये थे।करीब एक सप्ताह तक इलाज चलने के दौरान शनिवार सुबह उनकी मौत हो गयी।जिसकी खबर पाकर परिजनों में कोहराम मच गया।जिनका शव उनके पैतृक गांव सेमरहा,रामपुर उपरहार दोपहर में 3 बजे के करीब लाया गया।जहाँ मौके पर उपजिलाधिकारी करछना रत्न प्रिया त्रिपाठी,सीओ करछना सच्चिदानन्द,प्रभारी निरीक्षक करछना दीपेंद्र कुमार सिंह द्वारा माला पुष्प अर्पित कर सम्मान किया गया।जिसके पश्चात डीहा गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।जहाँ बड़ी संख्या में भाजपा नेता व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लोग जमा रहे। लक्मीशंकर ओझा का छात्र जीवन से ही राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है। 1980 के दशक में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महामंत्री रहे उसके पश्चात 1990 में अध्यक्ष रहे। जिस दौरान मिशाबंदी के एमरजेंसी के दौरान 24 महीने तक जेल में बंद रहे।जहाँ काफी तबियत बिगड़ने के बावजूद भी उन्होंने हार नही मानी। दो बार भाजपा के टिकट पर शहर पश्चिमी से विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद को टक्कर दे चुके है और एक बार करछना विधानसभा से भी विधानसभा का चुनाव लड़ चुके है। जो मूल रूप से करछना विकाश खण्ड के सेमरहा,रामपुर उपरहार गांव के रहने वाले थे।जिनकी दो बेटियां है।पत्नी का स्वर्गवास कुछ वर्ष पूर्व हो चुका है। जो गांव न रहकर जीवन पर्यंत शहर में रहकर छात्र राजनीतिक से शुरूवात कर भाजपा के कद्दावर नेताओ में उनका नाम सुमार रहा।

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