लाखों हैक्टर भूमि की प्यास बुझाने वाला माघोसागर बांध खुद है प्यासा

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सिकराय माधोसागर बांध में पानी की आवक नहीं, सैकड़ों किसानों की उम्मीद टूटी l दो जिलों के दर्जनों गांव होते थे लाभांवित, लेकिन जलस्तर गहराने के बाद लगातार घट रहा है रबी फसल बुआई का प्रतिशत l क्षेत्र का सबसे बड़ा बांध आज पानी के बिना तलाई में परिवर्तित हो गया है। एक समय था, जब वर्ष 1982 में बांध पर चादर चली थी। लेकिन अब यह बांध पिछले 23 सालों से लबालब होने को तरस रहा है। बांध में सालों से पानी की आवक नहीं होने से सिकराय के दर्जनों गांव ही नहीं करौली जिले के किसानों के लिए भी मायूसी का कारण बना हुआ है। तीनों और से पहाडियों से घिरा यह बांध खूबसूरती के साथ साथ हज़ारों किसानों को कृषि एवं लोगों की प्यास बुझाने के लिए लाइफ लाइन बना हुआ था l लेकिन बांध में पानी आवक क्षेत्र में दर्जनों एनीकट निर्माण होने एवं लगातार बारिश की कमी से यहां कई सालों से 10 फीट पानी भी नहीं आया। जिससे बांध की जगह यहा तलाई जैसा नजर आता है । जिले के महत्त्वपूर्ण बांध माधोसागर का भराव क्षेत्र 35 फुट है। लेकिन 1996 के बाद से खाली बांध के कारण पिछले 4-5 सालों से क्षेत्र के 50 गांव का जलस्तर बढ़कर 250 फीट से अधिक पहुंच गया है। जिससे 150 से 200 फीट गहराई पर लगे हैंडपंप व बोरवेल सूख चुके हैं। दर्जनों गांवों में किसानों को सिंचाई तो दूर पीने के पानी के भी लाले पड़ गए है। किसानों का कहना है कि बांध परिक्षेत्र में जहां आसानी से जमीन से पानी मिल जाता था, वहां अब लाखों खर्च कर 500 से 1000 फीट बोरवेल खुदवाने के बाद भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। जिससे किसानों की भूमि बंजर में तब्दील हो रही है l

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