बदल बदल कर उपयोग करें खाने का तेल

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भारतीय खानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है तेल, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग तेल (कुकिंग ऑयल) को लेकर उतने जागरूक नहीं होते, जितना होना चाहिए. विज्ञापन इस उलझन को और बढ़ा देते हैं, क्योंकि हर तेल सेहतमंद होने का दावा करता है, लेकिन किसके दावे में कितनी सच्चाई है, आम लोगों के लिए यह तय करना मुश्किल होता है. कौन-सा तेल सेहत के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद है? कितना तेल खाना चाहिए? अपना कुकिंग ऑयल क्यों बदलते रहना चाहिए? जैसे सवालों से आम आदमी परेशान ही होता है. आप कितनी मात्र में तेल का उपयोग करते हैं, यह जानने जितना ही जरूरी है कि आप किस तेल का उपयोग करते हैं. सही कुकिंग ऑयल का चयन हमारी सेहत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए अपना कुकिंग ऑयल सोच-समझ कर चुनें. वैज्ञानिकों ने एक शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि लगातार एक ही तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर तेल बदलते रहना चाहिए. इससे दिल की बीमारियां, मोटापा, शुगर व तेल के कारण होने वाली अन्य बीमारियों की आशंका कम हो जाती है.वैज्ञानिकों ने खाने वाले तेल को दो भागों में बांटा है. समूह ए में सरसों और सोयाबीन के तेल हैं, जिनमें ओमेगा 3 पाया जाता है और समूह बी में सूरजमुखी, मूंगफली जैसे तेल रखे गए हैं, जिनमें ओमेगा 6 होता है. यदि आप बदल-बदल कर तेल इस्तेमाल करेंगे तो ओमेगा 3 और ओमेगा 6 दोनों की जरूरतें पूरी हो जायेंगी . 

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