आंधी से फसलें हुई नष्ट,किसानो को करनी हॉगी दुबारा बुवाई ,

इन दिनों बारानी क्षेत्र में बरसात के आभाव में बुवाई नही हो पा रही है , फसलें आंधी से नष्ट हो गई है जिस के चलते किसानो को दुबारा बुवाई करनी होगी ।वही फसल बीमा की अधिसूचना भी जारी नही हुई है जिस के चलते खराबे का नही मिलेगा बीमे का लाभ। आधी जुलाई बीतने व श्रावण मास शुरू होने के बावजूद जिले में बरसात नही होने से किसानों के चहरो पर मायूसी है, जिले के 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बरसात से ही बुवाई होनी है।अब तक 10 प्रतिशत हिस्से में छूट-पुट बरसात से बुवाई हो सकी है।वही चार लाख हैक्टेयर क्षेत्र में ट्यूबेल व कुओं से सिंचाई सुविधा होने के बावजूद 70 प्रतिशत बुवाई ही हो पाई है बरसात नही होने से एक साथ बुवाई नही हो पा रही है।जिले में तीन लाख के लगभग सिंचित व एक लाख असिंचित क्षेत्र में बुवाई हो जाने व आंधियों के कारण फसल संकट में है।इन फसलों को बोने वाले किसान अगर बैंकों से ऋणी है तो इन फसलों का बीमा होना अनिवार्य है जिसके लिए 31 जुलाई तक फसल बीमा प्रीमियम इन किसानों के बैंक खातों से कटना तय है।लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा की राज्य सरकार ने अभी अधिसूचना जारी नही की है ऐसे में अभी बोई गई फसलों के आंधी से नष्ट होने पर किसान फसल बीमा क्लेम नही कर पाएंगे। किसानों से बीमा प्रीमियम तो वसूल होगा लेकिन फसलों के नष्ट होने के बावजूद फसल बीमा क्लेम नही मिल सकेगा।कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धूल भरी तेज हवा से जिले के कृषि क्षेत्रो में 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर बोई गई कपास व 80 हजार हेक्टेयर में बोई गई मूंगफली की फसल में15 से 25 प्रतिशत तक खराबा हुआ है।कृषि विभाग के उप निदेशक बी के द्विवेदी के अनुसार धूल भरी आंधियों से हालांकि सभी खड़ी फसलों में खराबा हुआ है पर सर्वाधिक खराबा मूंगफली की फसल में हुआ है।इनके अनुसार जिले के सभी कृषि क्षेत्रों में कपास ओर मूंगफली की बुवाई हो चुकी है और फसल के अंकुरित होते ही धूल भरी आंधियों से भूमि में हुए कटाव के कारण इस फसल के 25 प्रतिशत से अधिक पौधे उखड़कर नष्ट हो गए है। वही द्विवेदी के अनुसार तेज हवा के चलते मिट्टी के कटाव से अगेती मूंगफली की फसल में भी नुकसान के समाचार है। मिट्टी के कटाव के चलते पौधे अंकुरण अवस्था मे ही उखड़ गए है।आंधी का असर सब्जियों की फसलों ओर फूलों की खेती पर भी हुआ है।जिले में वर्तमान में करैला, भिंडी, बैंगन, ककड़ी, तरबूज व खरबूज की फसलों के साथ गुलाब ओर हजारे के पुष्पों की खेती हुई है। इन सभी पर आंधियों का प्रभाव पड़ने से इनकी पैदावार में गिरावट आई है।पश्चिमी राजस्थान में तेज अंधड़ से जहाँ कपास व मूंगफली की फसलें खराब होने से कर्ज ले कर बोई गई फसलों में ही किसान अपनी पूंजी लगा चुके है अब किसानों के पास दुबारा बुवाई के अतिरिक्त कोई उपाय नही है। लेकिन पुनः बुवाई से लागत दुगनी हो जाएगी जिससे उत्पादन के पश्चात लागत भी नही निकलने की आशंका से किसान पुनः बुवाई को लेकर भी उहापोह में है दूसरी ओर ऋणी किसानोंके लिए फसल बीमा अनिवार्य होने से किसानों की मुसीबत यही खत्म नही होकर फसल बीमा प्रीमियम की राशि चुकाने को लेकर आर्थिक संकट के रूप में आने वाली है।ऐसा ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा अनिवार्य होने से होगा। वर्तमान फसल बीमा नीति ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य है लेकिन अधिसूचना जारी नही होने से फसलों का बीमा नही हुआ है इससे पूर्व ही फसले नष्ट हो चुकी है ऐसे में फसल बीमा क्लेम नही कर पाने के बावजूद बीमा प्रीमियम चुकाना किसानों के लिए दोहरी मुसीबत लेकर आएगा।बी के द्विवेदी के अनुसार आंधियों से सब्जियों की सेहत पर प्रभाव पड़ सकता है। किसानो को सलाह दी जाती है कि वे सुबह के समय फव्वारा पद्धति से सिंचाई करे, ऎसे मे उत्पादन में होने वाली गिरावट की आशंका को काफी हद तक रोका जा सकता है। 

X

सर्कल जोधपुर
अपने शहर का अपना ऐप

ओसियां, तिंवरी, पीपाड़, फलोदी, बालेसर,... की हर खबर, वीडियो और भी बहुत कुछ! 👉

जोधपुर में 17000 से भी ज्यादा लोग हैं इस ऐप पर, आप भी इस सर्कल का हिस्सा बनें 👉

सर्कल ऐप
इंस्टॉल करें