मन्नत मांगने वाली महिलाओं की भर जाती है सूनी गोद

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कस्बा अमोलर के समीप प्रसिद्ध प्राचीन बाला जी मंदिर बिशोखर धाम आज भी श्रृद्धालुओं का आस्था का केंद्र बिंदु है । कुछ समय से आश्रम में  पधारे श्रीश्री108 सीताराम महाराज जर्जर हो चुके मंदिर को अब भव्य रुप देने में जुटे है। इस  मंदिर का इतिहास 1000 साल से अधिक पुराना है  इस मंदिर के पीछे कहानी बताई जाती है बाबा हरीदास बताते मंदिर के बगल में सरोवर था।बीहड़ जंगल हरे पेड़ पौधे, शेर चीता तेंदुआ जंगली जानवरों बिचरण करते थे। श्रृषियों की तपो भूमि रही दुर्वासा श्रृषी ने भी यहां कुछ दिन तपस्या की थी। बाबा सीताराम महाराज ने बताया  सुना गया है कि  राजा अंबरीष महाराज की राजधानी हुआ करती थी। इससे गांव का नाम अमोलर से जाना जाने लगा है। इसी  जगह दुर्वासा श्रृषी ने कठोर तपस्या की थी। राजा ने मंदिर का निर्माण कराया और बाला जी की स्थापना की थी। सदियों पुराने  इस मंदिर भक्त आज भी  अस्था से आते है सच्चे मंन से आने बालों की हर मुराद पूर्ण होती है। गुरु पूर्णिमा पर दसियों हजारों की भीड़ जुटती है। भक्त गण बताते है एक बार  चोर चोरी करके सब कुछ ले जाता रहे पर बाला जी को उठा नही सके ।जिन लोगों ने चोरी की कुछ घंटों बाद उनके परिवार में  मौते हो गए। भक्त गणों का कहना बैसे तो हर मुराद पूरी होती है खासकर महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है बाबा व बाला जी के आशीर्वाद से ।

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