आंतरिक गद्दारों पर भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

 भले ही नरेंद्र मोदी ने साढ़े चार साल में ही देश को विकास एवं मजबूती के शिखर पर पहुंचाने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर ली है, लेकिन उनके सामने एक अन्य ऐसा मोरचा है, जो अत्यंत कठिन है। कहावत है कि व्यक्ति भले ही दुनिया जीत ले, लेकिन घर में हार जाता है। अपने घर में वह उतनी कड़ाई नहीं कर पाता है, जितना बाहर कर लेता है। जवाहरलाल नेहरू ने जिस फर्जी सेकुलरवाद एवं मुसलिम तुष्टीकरण की नींव डाली, वह हमारे देश के लिए ऐसे दीमक की तरह हो गई, जो देश को खोखला कर रही है। सेकुलरवाद, मुस्लिम-तुष्टीकरण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में देशद्रोह ने पनपना शुरू किया, जिसे बाद में नेहरू वंश ने भरपूर खाद-पानी देकर पूरे देश में फैलाया। मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की दस-वर्षीय सरकार के समय तो वह कोढ़ देश के कोने-कोने में फैल गया। देशद्रोह की छूट के परिणामस्वरूप हमारे यहां खुलेआम ‘देश के टुकड़े-टुकड़े करने’ एवं ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने लगे तथा देश की जड़ खोदी जाने लगी। विश्व भर में मोदी सरकार को बदनाम करने के तरह-तरह के षड्यंत्र होने लगे। 70 वर्षों में देशद्रोही तत्वों के विरुद्ध सरकार की नरम एवं उदार नीति का दुष्परिणाम यह हुआ कि उन तत्वों का देश के कोने-कोने में छिपा हुआ जाल फैल गया है। उन छिपे तत्वों को हमारे तमाम राजनीतिक दलों द्वारा वोटबैंक के लालच में अपनाए गए फर्जी सेकुलरवाद एवं मुस्लिम-तुष्टीकरण की आड़ में पूरा संरक्षण दिया जाता है। इसी से जैसे ही देशद्रोही तत्वों पर हाथ डाला जाता है, उन तत्वों को संरक्षण देने वाले हंगामा करने लगते हैं।   जिस प्रकार मोदी सरकार ने हमेशा के लिए पाकिस्तान का इलाज करने की ठान ली है, उसी प्रकार अब उसे देश भर में फैले हुए देशद्रोही तत्वों के सफाये का भी अभियान चलाना चाहिए। लेकिन वह अभियान बड़ा कठिन है तथा उसके शुरू होते ही देशविरोधी तत्व हर तरह का उत्पात मचाएंगे। वैसे तत्वों की राजनीति, पत्रकारिता, साहित्य, कला, फिल्म-जगत, सभी क्षेत्रों में भरमार हो चुकी है। उसी का नतीजा है कि इस समय हमारा देश ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा हुआ है। आजादी के बाद जब पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों के वेश में कश्मीर घाटी पर कब्जा करने के लिए हमला किया था और श्रीनगर के पास तक घुस आई थी, उस समय जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराज हरी सिंह की सेना में जितने मुसलमान सैनिक थे, वे इसलाम के नाम पर गद्दारी कर पाकिस्तानी सेना से जाकर मिल गए थे।      हमारे देश में देशद्रोही तत्व जिस प्रकार फैले हुए हैं, निश्चित है कि यदि पाकिस्तान से युद्ध हो गया तो वे तत्व पाकिस्तान को लाभ एवं भारत को क्षति पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमें नहीं भूलना चाहिए कि चीन से युद्ध के समय हमारे देश के कम्युनिस्टों ने चीन का समर्थन किया था। एक समाचार के अनुसार समाजवादी पार्टी के नेता पंडित सिंह ने, जो अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री थे और गुण्डागर्दी के लिए मशहूर हुए थे, भारतीय सेना के विरुद्ध विषवमन किया है। उन्होंने पाकिस्तान के उस दावे का समर्थन करते हुए बयान दिया है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में जो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, उसमें उसने खाली पड़े घरों पर बम बरसाए, जहां कोई आतंकवादी नहीं मौजूद था। आज हमारे देश में देशद्रोही तत्व न केवल चप्पे-चप्पे में तथा हर वर्ग में फैले हुए हैं, बल्कि बहुत बड़ी संख्या में छिपकर रह रहे हैं। उनका पता लगाना बहुत कठिन है। इसके लिए मोदी सरकार को अतिशीघ्र अपना खुफियातंत्र बहुत सशक्त करना होगा, जो अभी दयनीय स्थिति में है। खुफियातंत्र के भ्रष्ट होने की भी शिकायतें मिलती हैं। वस्तुतः हमारे देश में जितने प्रकार के खुफियातंत्र हैं, उन सभी का पूरी तरह कायाकल्प (ओवरहॉलिंग) किए जाने की आवश्यकता है। खुफियातंत्र के महत्व पर चाणक्य ने बहुत जोर दिया था तथा वह तंत्र शासन की रीढ़ होता है। खुफियातंत्र के लिए अतिआवश्यक है कि वह अत्यंत योग्य, परिश्रमी एवं ईमानदार हो तथा शासन को निष्पक्ष रूप से बिलकुल सही जानकारी दे।   देश में बड़े पैमाने पर खुफियातंत्र को सक्रिय किया जाना चाहिए। वह हर मुहल्ले व हर गांव के प्रत्येक घर का पूरा लेखाजोखा अपने पास तैयार करे तथा संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे। देशद्रोही तत्वों का अब ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ द्वारा उन्मूलन किया जाना चाहिए तथा उस कार्रवाई के विरुद्ध किसी भी प्रकार के होहल्ले या विरोध से डरना नहीं चाहिए। जो लोग होहल्ला या विरोध करें, उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। देशद्रोह के विरुद्ध कार्रवाई में यदि कोई कानूनी बाधा आ रही हो तो उस कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया जाना चाहिए। देशद्रोही तत्वों के प्रति शिथिलता का ही परिणाम है कि कश्मीर घाटी में इस्लामी कट्टरता की आड़ में भारत-विरोधी एवं पाकिस्तान-समर्थक तत्व बहुत मुखर हैं। महबूबा मुफ्ती ने तो यह धमकी दी है कि यदि 35ए एवं अनुच्छेद 370 को खत्म करने का प्रयास किया गया तो कश्मीर में भयंकर मारकाट मच जाएगी तथा जनता भारत के तिरंगे की जगह दूसरे देश (अर्थात पाकिस्तान) का झंडा उठा लेगी। फारूक अब्दुल्ला व उमर अब्दुल्ला ने भी ऐसे विचार व्यक्त किए हैं। इससे सिद्ध होता है कि इस प्रकार के तत्व कश्मीर घाटी को अपनी बपौती व जागीर समझते हैं तथा भारत के प्रति उनके मन में देशभक्ति का पूर्ण अभाव है। अब्दुल्ला एवं मुफ्ती परिवार पाकिस्तानपरस्त माना जाता है तथा इन परिवारों पर कड़ी लगाम लगनी चाहिए।     कुख्यात उवैसी ने पाकिस्तान में भारत द्वारा की गई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का समर्थन किया है। उवैसी-जैसे तमाम कुख्यात देशद्रोही इस समय या तो चुप हैं अथवा उनमें से किसी-किसी ने भारत की कार्रवाई का समर्थन किया है। हमें इस ढोंग के भुलावे में नहीं फंसना चाहिए। उवैसी ने देश में मजहबी शांति की दुहाई दी है, लेकिन यह वही उवैसी है, जो हमेषा मजहबी जहर उगलता रहा है। इसी प्रकार के अन्य जहरीले तत्व हैं, जिनसे सावधान रहना चाहिए। देशवासियों की जबरदस्त देशभक्ति के कारण कांग्रेस, सपा, बसपा आदि फिलहाल सरकार की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, किन्तु जैसा उनका चरित्र रहा है, पप्पू, बबुआ, बुआ, केजरीवाल आदि जल्दी ही मुखौटा उतारकर अपने असली रूप में आ जाएंगे।

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