कुशलता व कीर्तिमानों का दिव्य भव्य कुम्भ

भारतीय दर्शन में कुम्भ की दिव्य प्रतिष्ठा रही है। लेकिन इस बार योगी आदित्यनाथ ने भव्यता की भी बहुत बड़ी लकीर खींच दी है। यह कार्य केवल शासन सत्ता के माध्यम से नहीं हो सकता। इसके लिए आस्था का धरातल होना अपरिहार्य है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी भावना से कुम्भ तैयारियों का निर्देशन किया। यही कारण है कि प्रारम्भ से समापन तक जय-जय होती रही। जो यहां आया वह व्यवस्था से प्रभावित होकर ही वापस लौटा। देखते ही देखते प्रयागराज कुम्भ में कई विश्वस्तरीय कीर्तिमान स्थापित हो गया। योगी ने इस अर्ध कुंभ की ऐसी व्यवस्था की, अनुमान लगाया जा सकता है कि पूर्ण कुम्भ की तैयारी का उनको अवसर मिला तो भव्यता कितनी बुलंद होगी।स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ की थीम सफल रही। आठ घंटे तक हजारों विद्यार्थियों ने पेंटिंग बनाई। गिनीज विश्व बुक रिकार्ड कायम हुआ। इसके पहले दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में चार हजार छह सौ पचहत्तर लोगों के एक वाल पर पेंटिंग करने का रिकॉर्ड था। इसी प्रकार दस हजार सफाई कर्मियों ने एक साथ सफाई करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके पहले यह रिकॉर्ड बांग्लादेश के नाम था। ढाका में एक स्थान पर सात हजार लोगों ने सफाई की थी। समापन समारोह में योगी आदित्यनाथ ने कहा भी की दो हजार तेरह के कुंभ में मॉरीशस के प्रधानमंत्री संगम स्नान के लिए आए थे लेकिन गंदगी और बदबू देखकर वापस लौट गए थे। जबकि इस बार कुंभ में बिना किसी कार्यक्रम के वह प्रयागराज पहुंचे और उन्होंने चार सौ प्रतिनिधियों के साथ संगम में स्नान भी किया। चौबीस करोड़ लोगों ने कुम्भ स्नान किया। कुंभ के बाद पर्यटन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर पहुंच गया है। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए बत्तीस सौ लोगो भी ने कुंभ में भी स्नान किया। योगी ने बताया कि अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन साल के ग्यारह महीने हो सकेंगे। प्रयागराज मेला प्राधिकरण अक्षयवट और सरस्वती कूप की देखरेख करेगा। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि उन्होंने अपने को भावनात्मक रूप से भी कुम्भ से जोड़ा है। यह अंतर तैयारियों में भी दिखाई दिया। पूरे मेला क्षेत्र और आवागमन के मार्गों पर भव्यता थी। मुख्यमंत्री अनेक बार प्रयागराज गए, सभी तैयारियों को स्वयं देखा। उनके निर्देश पर अनेक प्रकार के सुधार किए गए। तैयारियों का प्रारंभ ही हिन्दू जनभावना के अनुरूप था। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया। सरकार के प्रयासों से पहली बार किले में हनुमान जी और सरस्वती कूप के दर्शन की व्यवस्था की गई। यह कार्य पहले भी हो सकते थे। लेकिन इसके लिए अपेक्षित इच्छाशक्ति का अभाव था। योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए प्रयास किये। इतना ही नहीं योगी ने अपनी कैबिनेट की बैठक प्रयागराज में करके बड़ा सन्देश दिया है। इसमें प्रयागराज की कनेक्टिविटी के लिए गंगा एक्सप्रेस वे बनाने का निर्णय हुआ था। फोर लेन वाला यह एक्सप्रेस वे विश्व का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होगा। यह पश्चिमी यूपी को प्रयागराज से जोड़ेगा। छह सौ किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे मेरठ से प्रयागराज तक बनेगा। यह एक्सप्रेस-वे मेरठ, अमरोहा, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज आएगा। यह एक्सप्रेस-वे जब बनेगा तो दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा।छत्तीस सौ हेक्टेयर जमीन की वैदिक संस्कृत को रामायण के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा की स्थापना उपरांत पार्क का सौंदर्यीकरण किया गया। यहां पर सरकार अब महर्षि भारद्वाज आश्रम का भी भव्य सौंदर्यीकरण कराएगी। प्रयागराज से चित्रकूट के बीच पहाड़ी में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा और रामायण शोध संस्थान बनाने का फैसला लिया गया है। यहां पर महर्षि वाल्मिकी की प्रतिमा लगेगी। स्पष्ट है कि प्रयागराज में कैबिनेट की बैठक ने आधुनिक युग के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। योगी का दावा था कि पचास वर्षों में पहली बार तीर्थयात्रियों को इतना शुद्ध जल स्नान हेतु मिलेगा। यह वादा पूरा हुआ। दस जनवरी को राज्यपाल राम नाईक ने कलाग्राम परिसर में चलो मन गंगा यमुना तीर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया था।यूनेस्को ने कुम्भ को मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की संज्ञा दी है। सरकार ने प्रयागराज एवं अयोध्या का पौराणिक नाम पुनःस्थापित किया है। यहां पन्द्रह फ्लाईओवर, अण्डर ब्रिज बने, दो सौ चौसठ सड़कों का चौड़ीकरण हुआ है। चौराहों का भी चौड़ीकरण और सौन्दर्यीकरण किया गया है, मेला क्षेत्र का एरिया पहले के मुकाबले बढ़ाया गया, बाइस पान्टून ब्रिज बनाए गए, करीब सवा लाख शौचालय बनाये गए, बीस हजार से ज्यादा डस्टबिन मेला क्षेत्र में रखे गए, दस हजार श्रद्धालुओं की क्षमता का गंगा पंडाल बनाया गया, चार सांस्कृतिक पंडाल बनाये गए, देश के छह लाख गांवों का प्रतिनिधित्व कुम्भ में हुआ, बीस हजार श्रद्धालुओं के मेला क्षेत्र में रुकने की व्यवस्था की गई , इसके अलावा तरह सौ हेक्टेयर में चौरानवे पार्किंग स्थल बनाये, पहली बार पांच सौ से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे मेला क्षेत्र में हुए, पेंट माई सिटी में पन्द्रह लाख वर्ग फीट में दीवारें पेंट की गई । इतना ही नहीं कुम्भ के समापन के बाद भी भावी योजना का निर्धारण किया गया। मेला क्षेत्र में पचास हजार पचास हजार एलईडी लाइटें लगाई गई थी। चौसठ जनरेटर लगाए गए थे। इनमें से पैंतीस हजार लाइट और उन्चास जनरेटर जरूरत वाले नगरों को एलाट की जाएगी। शेष आरक्षित रखी जायेगी। निश्चित ही इस बार का कुम्भ अभूतपूर्व, अद्भुत और अविस्मरणीय था।

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